IMEC Corridor: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर पर लगा 'ब्रेक'

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
IMEC Corridor: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर पर लगा 'ब्रेक'

महत्वाकांक्षी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। वेस्ट एशिया में चल रही अस्थिरता के कारण इस प्रोजेक्ट का काम अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है, जिसका असर लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन की उम्मीदों पर पड़ेगा।

कभी रेल और शिपिंग लिंक्स के जरिए दुनिया को बदलने वाला इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) अब अनिश्चितता के दौर में है। हालांकि यह प्रोजेक्ट भारत, अमेरिका और सहयोगी देशों के लिए स्ट्रैटेजिक प्राथमिकता है, लेकिन वेस्ट एशिया में बढ़ती अस्थिरता ने इसके विस्तार पर अनिश्चितकालीन रोक लगा दी है। निवेशकों के लिए इसका मतलब यह है कि जिन इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स अवसरों की उम्मीद इस प्रोजेक्ट से जुड़ी थी, उनकी समय-सीमा अब अनिश्चित हो गई है।

काम क्यों रुका है?

IMEC की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल जैसे देशों में सुरक्षा व्यवस्था स्थिर रहे। वर्तमान में जारी भू-राजनीतिक (Geopolitical) घर्षण के कारण बड़े पैमाने पर क्रॉस-बॉर्डर निर्माण कार्य करना संभव नहीं है। इस प्रोजेक्ट को एशियाई मैन्युफैक्चरिंग हब को यूरोपीय बाजारों से जोड़ने और ट्रांजिट समय कम करने के लिए डिजाइन किया गया था। जब तक सुरक्षा का माहौल बेहतर नहीं होता, तब तक रेल और पोर्ट इंटीग्रेशन जैसा जटिल काम आगे नहीं बढ़ सकता।

बैकग्राउंड में क्या चल रहा है?

भले ही पब्लिक मोमेंटम रुक गया हो, लेकिन एडमिनिस्ट्रेटिव और टेक्निकल काम पूरी तरह बंद नहीं है। एक्सपर्ट्स की टीमें रूट मैपिंग और लॉजिस्टिक्स असेसमेंट पर काम कर रही हैं, ताकि डिप्लोमैटिक माहौल सुधरते ही काम तेजी से शुरू किया जा सके। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि निर्माण कंपनियों को अभी कोई तुरंत ऑर्डर मिलने वाले हैं या कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) शुरू हो गया है।

निवेशकों के लिए नजरिया

यह कॉरिडोर सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और एनर्जी ट्रांजिट के लिए एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं ने भी इसे मैरीटाइम कंजेशन को कम करने वाला बताया था, लेकिन मौजूदा हालात मल्टी-नेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जुड़े खतरों को उजागर करते हैं। अब बाजार की नजर केवल प्रोजेक्ट पर नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट की डिप्लोमैटिक स्थिरता पर है। जब तक वहां शांति नहीं होती, तब तक यह प्रोजेक्ट केवल एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक प्लान बना रहेगा, न कि कोई सक्रिय इकोनॉमिक ड्राइवर।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.