India और Mexico के बीच अक्टूबर की शुरुआत में एक खास ट्रेड एग्रीमेंट (Preferential Trade Agreement) को लेकर सहमति बनने जा रही है। इसका मुख्य मकसद इम्पोर्ट टैक्स के बोझ को कम करना है, जिससे Indian ऑटोमोबाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग कंपनियों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
भारत और मेक्सिको के बीच एक नई पार्टनरशिप की शुरुआत होने वाली है। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में दोनों देश 'Terms of Reference' पर दस्तखत करेंगे, जो भविष्य में एक व्यापक ट्रेड डील की नींव रखेगा। यह कदम न केवल व्यापारिक बाधाओं को दूर करेगा, बल्कि लैटिन अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका के बाजारों तक भारतीय सामान की पहुंच को और आसान बना देगा।
क्यों है यह डील इतनी जरूरी?
मेक्सिको ने हाल ही में अपनी पॉलिसी में बड़े बदलाव करते हुए 1,400 से ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरीज पर 50% तक का भारी-भरकम इम्पोर्ट टैरिफ लगा दिया था। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए मुकाबला करना मुश्किल हो गया था। अब इस नए एग्रीमेंट के जरिए ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर की कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके मार्जिन में सुधार हो सकता है।
USMCA का फायदा उठाने की तैयारी
यह समझौता केवल सीधे व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय फर्मों के लिए USMCA (United States-Mexico-Canada Agreement) क्षेत्र में एंट्री का एक स्ट्रैटेजिक रास्ता भी है। आज के समय में दुनिया भर की कंपनियां अमेरिका के नजदीक मैन्युफैक्चरिंग हब तलाश रही हैं, जिसमें मेक्सिको एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। इस एग्रीमेंट से भारतीय कंपनियां मेक्सिको के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का हिस्सा बनकर नॉर्थ अमेरिकन मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर सकेंगी।
मौजूदा ट्रेड के आंकड़े
फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा $7.83 बिलियन तक पहुंच गया था, जिसमें भारत अभी फायदे में (Trade Surplus) चल रहा है। इस डील के जरिए सरकार का लक्ष्य कस्टम की जटिलताओं जैसे नॉन-टैरिफ बैरियर्स को कम करना है, ताकि टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग गुड्स की सप्लाई चेन को रफ्तार दी जा सके।
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि फाइनल एग्रीमेंट में किन सामानों पर ड्यूटी छूट मिलती है और इसका असर एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर कितनी जल्दी दिखाई देता है।
