भारत और मेक्सिको ने एक नए ट्रेड पैक्ट के लिए बातचीत शुरू कर दी है, जिसका मकसद मेक्सिको द्वारा **1,400** से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर लगाए गए भारी टैरिफ से भारतीय एक्सपोर्टर्स को बचाना है। फाइनेंशियल ईयर **2026** में दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड **$7.83 बिलियन** रहा है।
भारत और मेक्सिको ने एक प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के लिए औपचारिक तौर पर बातचीत शुरू कर दी है। 28 अक्टूबर, 2026 को दोनों देशों ने 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' पर हस्ताक्षर किए, ताकि उन भारतीय एक्सपोर्टर्स को मदद मिल सके जो साल की शुरुआत से ही बढ़ी हुई ड्यूटी का सामना कर रहे हैं।
नई टैरिफ और चुनौतियां
1 जनवरी, 2026 से मेक्सिको ने 1,400 से ज्यादा सामानों पर 5% से 50% तक का नया टैरिफ लागू कर दिया है। इससे ऑटोमोबाइल, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग गुड्स के एक्सपोर्ट पर सीधा असर पड़ा है। नई वार्ता का मुख्य उद्देश्य मेक्सिको के बाजार में भारतीय सामानों की कीमत को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाना है।
अर्ली-हार्वेस्ट स्ट्रैटेजी
नेगोशिएटर्स अभी 'अर्ली-हार्वेस्ट अरेंजमेंट' पर ध्यान दे रहे हैं। यह एक ऐसा तरीका है जिसमें पूरी डील फाइनल होने से पहले ही कुछ नॉन-सेंसिटिव सामानों पर टैरिफ कम कर दिया जाता है। निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ऑटो कंपोनेंट्स और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों को जल्दी राहत मिल सकती है।
रणनीतिक महत्व और जटिलता
मेक्सिको, नॉर्थ अमेरिकन सप्लाई चेन का गेटवे है। हालांकि, वहां के कड़े 'ओरिजिन रूल्स' का पालन करना भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। चूंकि भारत का मेक्सिको के साथ $3.62 बिलियन का ट्रेड सरप्लस है, इसलिए वार्ता के दौरान भारत को एक्सपोर्ट बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को सुरक्षित रखने के बीच संतुलन बनाना होगा।
आगे क्या देखें?
स्टेकहोल्डर्स की नजर अब इस बात पर है कि अर्ली-हार्वेस्ट लिस्ट में किन-किन सेक्टरों को जगह मिलती है। विशेष रूप से केमिकल, ऑटो पार्ट्स और फार्मा सेक्टर के निवेशकों को ऑफिशियल अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन पर मिलने वाली रियायतें ही भविष्य में कंपनियों के मार्जिन को तय करेंगी।
