साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार दो ध्रुवों में बंट गया है। जहां Nifty 50 में **12%** की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं AI से जुड़े चुनिंदा स्टॉक्स ने **60%** का उछाल भरकर बाजार को चौंका दिया है।
बाजार में गहराता अंतर (Market Divergence)
भारतीय शेयर बाजार इस समय एक अजीब दौर से गुजर रहा है। एक तरफ बेंचमार्क इंडेक्स Nifty 50 में इस साल 12% की गिरावट आई है, तो दूसरी तरफ AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। मार्केट डेटा के मुताबिक, ऐसी 42 कंपनियां, जिन्हें 'AI इनेबलर्स' माना जा रहा है, उनमें 60% तक की बढ़त देखी गई है। ये कंपनियां मुख्य रूप से पावर जनरेशन, डेटा सेंटर्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम कर रही हैं।
FPI का भारी दबाव और IT सेक्टर की चुनौती
बाजार की इस सीमित तेजी के पीछे का सच यह है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से अब तक लगभग $25 अरब की निकासी की है। वैश्विक स्तर पर पूंजी का रुख अमेरिका और अन्य विकसित बाजारों की टेक-हैवी इंडेक्स की तरफ मुड़ने से भारतीय बाजार में लिक्विडिटी का संकट बढ़ा है। वहीं, IT सेक्टर के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण क्लाइंट्स अब ट्रेडिशनल IT सर्विसेज के लिए कम दाम चुका रहे हैं, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है।
रिस्क और वैल्युएशन पर नजर
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता AI स्टॉक्स का वैल्युएशन है। ये स्टॉक्स फिलहाल अपने फॉरवर्ड अर्निंग्स के 36 गुना पर ट्रेड कर रहे हैं। अगर ग्लोबल लेवल पर AI स्पेंडिंग में कोई भी कमी आती है, तो इन स्टॉक्स में बड़ी गिरावट का रिस्क बना हुआ है। इसके अलावा, RBI द्वारा करेंसी डिप्रिसिएशन और महंगाई को लेकर जताई गई चिंताएं भारतीय कंपनियों की फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी की परीक्षा ले रही हैं।
