India Manufacturing PMI: अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी, 5 साल के निचले स्तर पर डेटा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Manufacturing PMI: अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार धीमी, 5 साल के निचले स्तर पर डेटा

HSBC India Manufacturing PMI अगस्त में गिरकर **52.8** पर आ गया है, जो पिछले 5 वर्षों में विकास की सबसे धीमी दर है। नए ऑर्डर्स में कमी के चलते कंपनियों ने **30 महीनों** में पहली बार छंटनी शुरू की है।

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अगस्त महीने में सुस्ती देखी गई है, जहां HSBC India Manufacturing PMI जुलाई के 53.5 से गिरकर 52.8 पर पहुंच गया है। हालांकि 50 से ऊपर की रीडिंग विकास का संकेत देती है, लेकिन यह पिछले 5 वर्षों की सबसे धीमी रफ्तार है।

नई भर्तियों में कटौती

आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पहलू रोजगार पर पड़ा असर है। पिछले 30 महीनों में पहली बार फैक्ट्रियों में कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है। कंपनियों का यह कदम बताता है कि वे अब आक्रामक विस्तार के बजाय कॉस्ट कंट्रोल पर ध्यान दे रही हैं क्योंकि नए ऑर्डर्स की ग्रोथ अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर है।

महंगाई और मार्जिन की स्थिति

हालांकि डिमांड कम है, लेकिन इनपुट कॉस्ट में कुछ राहत मिली है जो 6 महीने के निचले स्तर पर है। कंपनियां अब ग्राहकों पर ज्यादा बोझ नहीं डाल रही हैं, जिससे 'आउटपुट चार्ज इन्फ्लेशन' 45 महीनों के निचले स्तर पर आ गया है। कंपनी का मैनेजमेंट अब मार्जिन बनाए रखने के लिए सेल वॉल्यूम पर ज्यादा जोर दे रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है आगे?

भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रहे इस कूलिंग ट्रेंड का असर अब आगामी त्योहारी सीजन पर टिका है। यदि फेस्टिवल सीजन में घरेलू डिमांड नहीं बढ़ती है, तो कंपनियों के इन्वेंट्री लेवल और प्रॉफिट पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों की नजर अब कैपिटल गुड्स और मेटल सेक्टर पर बनी रहनी चाहिए, क्योंकि ग्लोबल डिमांड और मार्जिन मैनेजमेंट आने वाले समय में स्टॉक्स की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.