India Manufacturing PMI: मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में सुस्ती, PMI गिरकर **54.7** पर आया

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Manufacturing PMI: मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में सुस्ती, PMI गिरकर **54.7** पर आया

अक्टूबर 2026 में भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ गई है और PMI गिरकर **54.7** पर पहुंच गया है। घरेलू मांग में नरमी के बावजूद मजबूत एक्सपोर्ट ऑर्डर्स ने प्रोडक्शन को संभाले रखा है, लेकिन निवेशकों के लिए मार्जिन पर दबाव का जोखिम बना हुआ है।

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अक्टूबर 2026 में विस्तार तो जारी रहा, लेकिन तेजी की रफ्तार थोड़ी कम हो गई है। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) सितंबर के 55.1 से गिरकर इस बार 54.7 पर दर्ज किया गया है। हालांकि 50 के ऊपर की रीडिंग सेक्टर में ग्रोथ का संकेत देती है, लेकिन यह गिरावट बताती है कि पिछली तिमाहियों जैसी तूफानी रफ्तार में कमी आई है।

एक्सपोर्ट ने थामी डोर

इस महीने इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा सहारा बाहरी व्यापार (External trade) बना। नए एक्सपोर्ट ऑर्डर्स 6 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। अमेरिका, यूके, सऊदी अरब, बांग्लादेश, कनाडा और इंडोनेशिया जैसे देशों से आई मजबूत मांग के चलते मैन्युफैक्चरर्स अपने प्रोडक्शन शेड्यूल को बरकरार रखने में कामयाब रहे, जबकि घरेलू बाजार में सुस्ती साफ देखी गई।

मार्जिन पर निवेशकों की नजर

निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय कॉस्ट मैनेजमेंट है। इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन फरवरी 2026 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर है, लेकिन कंपनियां इस राहत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं। कंपनियों द्वारा सेलिंग प्राइस बढ़ाने की रफ्तार करीब 4 साल के निचले स्तर पर है। इसका सीधा मतलब है कि मैन्युफैक्चरर्स प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए खुद लागत का बोझ उठा रहे हैं, जो आने वाली तिमाहियों में कॉरपोरेट मुनाफे (Profit Margins) को प्रभावित कर सकता है।

वर्कफोर्स और बिजनेस सेंटीमेंट

बिजनेस सेंटीमेंट थोड़ा सतर्क है। आने वाले साल में प्रोडक्शन बढ़ने की उम्मीद रखने वाली कंपनियों की संख्या ऐतिहासिक औसत से कम हो गई है। इसके बावजूद, वर्कलोड संभालने के लिए कंपनियों ने लगातार दूसरे महीने अपनी हेडकाउंट (Headcount) में बढ़ोतरी की है, जो यह दिखाता है कि वे अभी छंटनी के मूड में नहीं हैं।

आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों की प्राइसिंग पावर और मार्जिन सस्टेनेबिलिटी पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी। तिमाही नतीजों में मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव यह तय करेगा कि घरेलू मैन्युफैक्चरर्स अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को कैसे बनाए रखते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.