भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सितंबर में नई ऊंचाई पर है। मजबूत एक्सपोर्ट और घरेलू ऑर्डर्स के दम पर PMI बढ़कर **55.1** के स्तर पर पहुंच गया है, हालांकि बढ़ती लागत और RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आहट निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।
सितंबर 2026 में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने जोरदार वापसी की है। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 55.1 पर आ गया है, जो अगस्त के 52.8 के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। ध्यान रहे कि 50 से ऊपर का स्कोर विस्तार (Expansion) का संकेत देता है।
क्यों बढ़ी है डिमांड?
इस तेजी के पीछे बड़ी वजह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले नए ऑर्डर्स हैं। अमेरिका, यूरोप, ब्राजील और UAE जैसे देशों से भारी मांग देखने को मिली है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर ने इस विकास में सबसे अहम भूमिका निभाई है। मांग पूरी करने के लिए फैक्ट्री एम्प्लॉयमेंट (रोजगार) में भी मई के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मार्जिन पर बढ़ता दबाव
आंकड़े तो अच्छे हैं, लेकिन कंपनियों की टेंशन भी बढ़ गई है। स्टील और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स जैसे रॉ मैटेरियल महंगे होने से प्रॉफिट मार्जिन पर मार पड़ रही है। कंपनियां अब इस दुविधा में हैं कि बढ़ती महंगाई का बोझ ग्राहकों पर कितना डाला जाए।
क्या RBI बढ़ाएगा ब्याज दरें?
महंगाई को देखते हुए बाजार अब RBI के रुख पर नजर गड़ाए हुए है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई को कंट्रोल करने के लिए सेंट्रल बैंक अक्टूबर 2026 में रेपो रेट (Repo Rate) में इजाफा कर सकता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कंपनियों के लिए कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा, जो आने वाले समय में उनकी ग्रोथ के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
