Smartphone Screen Protectors: अब अनिवार्य होगा BIS सर्टिफिकेट, जानें निवेशकों के लिए क्या है बड़ी खबर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Smartphone Screen Protectors: अब अनिवार्य होगा BIS सर्टिफिकेट, जानें निवेशकों के लिए क्या है बड़ी खबर

सरकार ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर्स के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) को अनिवार्य कर दिया है। यह नियम **1 अप्रैल, 2027** से लागू होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य सस्ती और घटिया क्वॉलिटी के विदेशी इम्पोर्ट्स पर लगाम लगाना और घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा देना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर्स के लिए एक नए क्वालिटी स्टैंडर्ड की घोषणा की है। 1 अप्रैल, 2027 से भारत में बिकने वाले सभी स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को BIS (Bureau of Indian Standards) के तय मानकों पर खरा उतरना होगा। यह फैसला भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को सिर्फ असेंबली से हटाकर हाई-वैल्यू कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जाने की सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट

इलेक्ट्रॉनिक्स सचिव एस कृष्णन के मुताबिक, भारत में अब घरेलू प्रोडक्शन क्षमता इतनी बढ़ गई है कि वह बाजार की मांग को पूरा कर सकती है। नए नियमों के जरिए सरकार उन सस्ते और कमतर क्वॉलिटी वाले इम्पोर्ट्स के लिए एक बाधा खड़ी कर रही है, जो अब तक लोकल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे। यह कदम Optiemus Infracom और अमेरिका की Corning जैसी कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, जो नोएडा में अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस मजबूत कर रही हैं।

निवेशकों के लिए संकेत

यह नीति बदलाव 'वैल्यू एडिशन' की दिशा में एक अहम कदम है। पहले सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ तैयार उत्पादों को असेंबल करने पर था, लेकिन अब सप्लाई चेन के मुख्य हिस्सों को देश के भीतर लाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, छोटी कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना और अपनी प्रोडक्शन लागत को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती हो सकता है।

निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह बदलाव बाजार में कंसोलिडेशन लाता है, जहां बेहतर स्केल वाली बड़ी कंपनियां बाजी मार ले जाएं। इसके अलावा, सरकार अब पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए सेमीकंडक्टर स्पेस के 'लेगेसी नोड्स' पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। आने वाले समय में, यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स क्वॉलिटी स्टैंडर्ड्स के साथ-साथ अपनी कीमत में प्रतिस्पर्धा को कैसे बनाए रखते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.