Fiscal Deficit Target: सरकार का सख्त रुख, 4.3% के लक्ष्य के साथ घटाया सरकारी कर्ज

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Fiscal Deficit Target: सरकार का सख्त रुख, 4.3% के लक्ष्य के साथ घटाया सरकारी कर्ज

भारत सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य **4.3%** GDP तय किया है। सरकार ने अपनी उधारी (Borrowing) को घटाकर **₹15.995 लाख करोड़** कर दिया है, लेकिन **7.3%** की बॉन्ड यील्ड और महंगाई का जोखिम निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।

भारत सरकार फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए अपने फिस्कल मैनेजमेंट को लेकर बेहद गंभीर है। सरकार का 4.3% का फिस्कल डेफिसिट टारगेट मार्केट के लिए एक बड़ा संकेत है, जो यह दर्शाता है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भी सरकार अपनी उधारी पर लगाम लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती छह महीनों का डेटा देखें, तो डेफिसिट ₹7.14 लाख करोड़ रहा, जो कि पूरे साल के टारगेट का लगभग 42.1% है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार अपने बजटीय प्लान पर मजबूती से काम कर रही है।

बॉन्ड यील्ड और उधारी का गणित

यह अनुशासन ऐसे समय में है जब ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव है। बेंचमार्क 10-साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड फिलहाल 7.3% के आसपास बनी हुई है, जो पूरे फाइनेंशियल सिस्टम पर दबाव डाल रही है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे बिजनेस विस्तार की रफ्तार पर असर पड़ सकता है। इसे कम करने के लिए सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपनी मार्केट उधारी को पिछले अनुमान ₹17.2 लाख करोड़ से घटाकर ₹15.995 लाख करोड़ कर दिया है।

कर्ज घटाने की राह पर भारत

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अनुमान के मुताबिक, भारत इकलौती ऐसी प्रमुख इमर्जिंग मार्केट इकोनॉमी है जो 2025 से 2031 के बीच अपने कर्ज-से-GDP (Debt-to-GDP) अनुपात को कम करने की स्थिति में है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, यह अनुपात पिछले साल के 56.1% से गिरकर फाइनेंशियल ईयर 27 में 55.6% तक आने की उम्मीद है।

आने वाले रिस्क

हालांकि सरकार का विजन साफ है, लेकिन बाजार की नजरें कुछ रिस्क फैक्टर्स पर टिकी हैं। अल नीनो (El Niño) जैसे क्लाइमेट संबंधी जोखिम कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे फूड इन्फ्लेशन बढ़ सकती है। यदि ऐसी स्थिति बनी, तो सरकार को रूरल सपोर्ट और सोशल वेलफेयर पर खर्च बढ़ाना पड़ सकता है, जो डेफिसिट टारगेट के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। आने वाले समय में टैक्स कलेक्शन के ट्रेंड्स और सरकारी खर्च के पैटर्न पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.