भारत और MERCOSUR ट्रेड ब्लॉक ने अपने मौजूदा एग्रीमेंट के विस्तार के लिए बातचीत शुरू कर दी है, जो सालाना **$21 बिलियन** के कारोबार को कवर करता है। इसके साथ ही, कस्टम्स के पेपरवर्क को कम करने के लिए डिजिटल प्रोटोकॉल भी लागू किए गए हैं।
व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार
भारत और MERCOSUR ब्लॉक (जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, उरुग्वे और पराग्वे शामिल हैं) ने अपने ट्रेड एग्रीमेंट को और व्यापक बनाने के लिए आधिकारिक रूप से बातचीत शुरू कर दी है। 14 सितंबर 2026 को कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल और उरुग्वे के फॉरेन मिनिस्टर मारियो लुबेटकिन ने इस रणनीतिक कदम का ऐलान किया।
मौजूदा स्थिति और लक्ष्य
साल 2009 से लागू इस एग्रीमेंट के तहत अभी भारत के लिए 450 और MERCOSUR के लिए 452 प्रोडक्ट कैटेगरी पर टैरिफ रियायतें मिलती हैं। अब दोनों पक्ष 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' तैयार कर रहे हैं, जिससे नए क्षेत्रों में बाजार तक पहुंच आसान बनाई जा सकेगी।
डिजिटल बदलाव से कम होगा खर्च
दोनों पक्षों ने 'इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' लागू करने के लिए एक प्रोटोकॉल साइन किया है। इससे कस्टम्स की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगी, जिससे:
- ट्रांजेक्शन कॉस्ट में कमी आएगी।
- प्रोसेसिंग टाइम तेजी से घटेगा।
- व्यापार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
निवेशकों के लिए संकेत
साल 2025 में द्विपक्षीय व्यापार $21 बिलियन तक पहुंच चुका है। दक्षिण अमेरिकी बाजारों में विस्तार भारतीय निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है। हालांकि, लंबी भौगोलिक दूरी और हाई लॉजिस्टिक्स कॉस्ट मुनाफे पर असर डाल सकती है। निवेशकों को अब 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' के फाइनल होने का इंतजार करना चाहिए, जिससे यह साफ होगा कि किन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला है।
