भारत और MERCOSUR ट्रेड ब्लॉक के बीच डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। अब इलेक्ट्रॉनिक 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' को मान्यता मिलेगी, जिससे कस्टम्स की देरी और पेपरवर्क कम होगा।
भारत और MERCOSUR ट्रेड ब्लॉक, जिसमें अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे शामिल हैं, ने ट्रेड डॉक्यूमेंटेशन को डिजिटाइज करने के लिए एक नए प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत, अब इलेक्ट्रॉनिक 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' को कानूनी रूप से मान्यता दी जाएगी, जो दशकों से चले आ रहे धीमी और थकाऊ कागजी कामकाज को पूरी तरह खत्म कर देगा।
एक्सपोर्टर्स के लिए क्या बदलेगा?
भारतीय एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए यह एक बड़ा सुधार है। अब तक फिजिकल डॉक्यूमेंट्स की मैनुअल जांच के कारण पोर्ट्स पर घंटों की देरी होती थी। अब इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट्स के आने से न केवल ट्रांजैक्शन कॉस्ट में कमी आएगी, बल्कि अटलांटिक पार माल की आवाजाही भी तेज होगी।
PTA के विस्तार की तैयारी
यह नया प्रोटोकॉल 2009 से लागू मौजूदा 'प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट' (PTA) में सुधार करता है। वर्तमान में यह एग्रीमेंट लगभग 450 टैरिफ लाइन्स तक सीमित है, लेकिन इस नए समझौते के साथ ही दोनों पक्षों ने PTA के दायरे को बढ़ाने के लिए औपचारिक बातचीत भी शुरू कर दी है। यदि यह सफल होता है, तो भारतीय कंपनियों के लिए साउथ अमेरिकन मार्केट में व्यापार की बड़ी संभावनाएं खुलेंगी।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
हालांकि यह खबर पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि यह सिस्टम अभी एक्टिव नहीं हुआ है। इसके लागू होने के लिए भारत और MERCOSUR के सभी सदस्य देशों में घरेलू स्तर पर 'रैटिफिकेशन' (Ratification) की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। जब तक ये कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं होतीं, ट्रेड मौजूदा नियमों के तहत ही चलता रहेगा।
