केंद्र सरकार ने FY27 के लिए अपने कुल बोरिंग टारगेट को **₹17.2 लाख करोड़** से घटाकर **₹15.9 लाख करोड़** कर दिया है। सरकार के इस कदम से बाजार में बॉन्ड की सप्लाई कम होगी, जिससे यील्ड (Yield) पर दबाव कम होने और निजी क्षेत्र के लिए लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद है।
बाजार पर क्या होगा असर?
सरकार के इस फैसले से डेट मार्केट (Debt Market) में हलचल तेज है। बजट में जो ₹17.2 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया था, उसे घटाकर ₹15.9 लाख करोड़ करना सरकारी खजाने की बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
दूसरी छमाही का प्लान
चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही के लिए सरकार ₹7.86 लाख करोड़ की राशि 23 साप्ताहिक नीलामियों (Weekly Auctions) के जरिए जुटाएगी। इसमें ₹15,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल क्लाइमेट-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा। यह पारदर्शी शेड्यूलिंग म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों जैसे बड़े निवेशकों को बेहतर प्लानिंग में मदद करेगी।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
इकोनॉमी में ब्याज दरें तय करने में सरकारी बॉन्ड यील्ड एक बेंचमार्क का काम करती है। जब सरकार बाजार से कम कर्ज लेती है, तो बॉन्ड की सप्लाई कम हो जाती है। यदि निवेशकों की तरफ से मांग स्थिर रहती है, तो बॉन्ड यील्ड में गिरावट आ सकती है। इससे बैंकों और प्राइवेट कंपनियों के लिए फंड जुटाना सस्ता हो सकता है, जिससे बिजनेस एक्सपेंशन के लिए ज्यादा लिक्विडिटी उपलब्ध होगी।
हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि यह कटौती किस आधार पर की गई है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अगर यह टैक्स रेवेन्यू बढ़ने के कारण है, तो यह फिस्कल प्रूडेंस (Fiscal Prudence) का संकेत है, लेकिन अगर सरकारी खर्चों में कटौती के कारण है, तो इसका असर लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें साप्ताहिक नीलामी के नतीजों और बॉन्ड यील्ड में होने वाले उतार-चढ़ाव पर टिकी हैं।
