गरीबी पर बड़ा प्रहार: 25 करोड़ लोगों को मिली नई पहचान, मोदी सरकार का नया इकोनॉमिक मॉडल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
गरीबी पर बड़ा प्रहार: 25 करोड़ लोगों को मिली नई पहचान, मोदी सरकार का नया इकोनॉमिक मॉडल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि पिछले एक दशक में **25 करोड़** भारतीय गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। Bloomberg New Economy Forum में पीएम ने साफ कर दिया है कि अब सरकार की प्राथमिकता वेलफेयर से हटकर डिजिटल एम्पावरमेंट और स्किल-बिल्डिंग पर है।

नई दिल्ली में आयोजित Bloomberg New Economy Forum को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि भारत में पिछले 10 सालों में 25 करोड़ नागरिकों को गरीबी के दायरे से बाहर निकालने में सफलता मिली है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों में आए बड़े बदलाव का संकेत है।\n\n### सब्सिडी से आत्मनिर्भरता की ओर\nसरकार अब उस पुराने मॉडल से किनारा कर रही है जो केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर था। इसके बजाय, अब जोर 'इंडिविजुअल एम्पावरमेंट' यानी व्यक्तिगत सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर है। इस नीति का सीधा असर भारतीय इकोनॉमी पर पड़ेगा, क्योंकि सरकार का लक्ष्य एक ऐसा वर्कफोर्स तैयार करना है जो फॉर्मल इकोनॉमी का हिस्सा बने।\n\n### डिजिटल क्रांति बनी गेम-चेंजर\nइस आर्थिक बदलाव का मुख्य आधार 'डिजिटल एक्सेस' को बनाया गया है। भारत में प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का यूजर बेस अब 50 करोड़ के पार पहुंच चुका है। सरकार इसे सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि एजुकेशन, फाइनेंस और मार्केट एक्सेस का मुख्य माध्यम मान रही है। आने वाले समय में टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश की रफ्तार और तेज होने के संकेत हैं।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?\nइन्वेस्टर नजरिए से यह बदलाव काफी अहम है। जैसे-जैसे लोगों की डिस्पोजेबल इनकम (खर्च करने योग्य आय) बढ़ेगी, इसका सीधा फायदा रिटेल, बैंकिंग और डिजिटल सर्विस सेक्टर्स को मिलेगा। बड़ी आबादी का फॉर्मल मार्केट से जुड़ना इन कंज्यूमर-फेसिंग इंडस्ट्रीज के लिए एक बड़ा 'ग्रोथ ड्राइवर' साबित हो सकता है।\n\nहालांकि, बाजार की नजर इस पर भी रहेगी कि स्किल-बिल्डिंग प्रोग्राम्स कितने प्रभावी साबित होते हैं और नौकरियों का सृजन किस गति से होता है। महंगाई पर नियंत्रण और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच का विस्तार ही यह तय करेगा कि भारत की यह आर्थिक उड़ान कितनी लंबी और टिकाऊ होगी।

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