India-Liechtenstein Tax Pact: भारत-लिख्तेन्स्टीन के बीच टैक्स डील पर तेजी, निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India-Liechtenstein Tax Pact: भारत-लिख्तेन्स्टीन के बीच टैक्स डील पर तेजी, निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

भारत और लिख्तेन्स्टीन ने 'डबल टैक्सेशन' से बचने के लिए एक नए टैक्स एग्रीमेंट की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह कदम India-EFTA ट्रेड फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य अगले 15 वर्षों में भारत में **$100 बिलियन** का निवेश लाना है।

भारत और लिख्तेन्स्टीन ने द्विपक्षीय व्यापार को आसान बनाने के लिए 'डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट' (DTAA) पर बातचीत शुरू कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों को एक ही आय पर दो बार टैक्स देने की समस्या से बचाना है। यह करार भारत और EFTA देशों (आइसलैंड, लिख्तेन्स्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड) के बीच हुए व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट (TEPA) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।\n\n### निवेश का बड़ा लक्ष्य\n\nTEPA समझौते के तहत भारत ने अगले 15 साल में $100 बिलियन के फॉरेन इन्वेस्टमेंट का लक्ष्य रखा है। हालांकि अभी दोनों देशों के बीच सीधा व्यापार $3.3 मिलियन (FY26) के आसपास है, लेकिन लिख्तेन्स्टीन की कंपनियां पहले ही भारत में $110 मिलियन का निवेश कर चुकी हैं।\n\n### किन क्षेत्रों में दिखेगा असर?\n\nवड़ोदरा में Hilti की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, Savannah Seeds की एग्री-टेक पहल और LGT Group का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर पहले से ही भारत में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं।\n\nहेरेडिटरी प्रिंस एलॉयस (Hereditary Prince Alois) की हालिया नई दिल्ली यात्रा ने इस आर्थिक साझेदारी को और मजबूती दी है। वित्त मंत्रालय और संबंधित सरकारी एजेंसियां अब इस टैक्स फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत को आगे बढ़ा रही हैं। यह समझौता न केवल टैक्स संबंधी रिस्क को कम करेगा, बल्कि भारतीय बाजार में यूरोपीय कंपनियों के लिए बिजनेस करना कहीं ज्यादा सस्ता और आसान बना देगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.