भारत की इकॉनमी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है। **98%** इकोनॉमिस्ट भारत के ग्रोथ आउटलुक को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन टॉप इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन की लिस्ट में भारत खिसक कर चौथे नंबर पर आ गया है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ताजा रिपोर्ट 'चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक' के मुताबिक, भारत का ग्रोथ इंजन अभी भी सबसे दमदार बना हुआ है। सर्वे में शामिल 98% इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय इकॉनमी में मजबूत तेजी देखने को मिलेगी, जिसका सबसे बड़ा सहारा घरेलू मांग (Domestic Demand) है।
घटता आकर्षण और कॉरपोरेट चिंताएं
इतने मजबूत आंकड़ों के बावजूद, बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) भारत को लेकर थोड़ा सतर्क हो गई हैं। कॉरपोरेट पसंद के मामले में भारत दो पायदान खिसककर चौथे नंबर पर पहुंच गया है। मई में जहां 56% कंपनियां भारत को टॉप-3 निवेश गंतव्यों में रखती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर महज 40% रह गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कंपनियां अब ज्यादा फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं।
मार्केट के लिए चुनौतियां
सर्वे में शामिल 97% इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन आने वाले समय में आर्थिक अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह बनेगी। इसका असर फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के प्रवाह पर पड़ सकता है, जो सीधे तौर पर मार्केट सेंटीमेंट और रुपये की चाल को प्रभावित कर सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर नजर
डिजिटल इंडिया के सपने को रफ्तार देने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर की राह में भी रोड़े आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 79% इकोनॉमिस्ट्स को डर है कि रेगुलेटरी बाधाएं और सार्वजनिक विरोध डेटा सेंटर्स के विस्तार की गति को धीमा कर सकते हैं। अब निवेशकों को अगली तिमाही की कॉर्पोरेट अर्निंग्स और कैपिटल स्पेंडिंग ट्रेंड्स पर नजर रखनी होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निवेश में यह सुस्ती सिर्फ एक अस्थायी रुझान है या कोई बड़ा बदलाव।
