World Economic Forum की लेटेस्ट रिपोर्ट में भारत ने बाजी मार ली है। करीब **74%** चीफ इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि भारत की ग्रोथ रफ्तार बरकरार रहेगी। हालांकि, ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव निवेशकों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं।
भारत का दबदबा
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की 'सितंबर 2026 चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक' रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे चमकीला सितारा बनकर उभरी है। मजे की बात यह है कि मई महीने में जहां सिर्फ 52% एक्सपर्ट्स भारत की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 74% पर पहुंच गया है।
ग्लोबल मार्केट से तुलना
दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में भारत की स्थिति कहीं ज्यादा मजबूत है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां चीन को लेकर एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है और यूरोप में 61% इकोनॉमिस्ट्स सुस्त ग्रोथ की आशंका जता रहे हैं, वहीं भारत के लिए 98% एक्सपर्ट्स कम से कम 'मॉडरेट ग्रोथ' की उम्मीद कर रहे हैं।
ग्रोथ के मुख्य इंजन
भारत की इस तेजी के पीछे सरकार की बदलती नीतियां हैं। अब देश केवल फिजिकल सपोर्ट पर निर्भर नहीं है, बल्कि 'फ्लेक्सिबल सप्लाई चेन' और 'इकोनॉमिक डायवर्सिफिकेशन' पर जोर दिया जा रहा है। टेक्नोलॉजी में इनोवेशन और एनर्जी सेक्टर में बदलाव भविष्य की नींव मजबूत कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
सब कुछ अच्छा होने के बावजूद, रिपोर्ट में एक बड़ा रिस्क फैक्टर भी बताया गया है। करीब 97% एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्लोबल लेवल पर चल रहा जियोपॉलिटिकल संघर्ष दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। घरेलू फंडामेंटल्स मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को ग्लोबल घटनाओं पर बारीक नजर रखने की जरूरत है।
