भारत अब BRICS देशों के साथ मिलकर साझा सुपरकंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप फंड बनाने की तैयारी में है। इस पहल का मुख्य मकसद ग्लोबल AI दिग्गज कंपनियों के दबदबे को कम करना और डिजिटल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
भारत आगामी 18वें BRICS समिट (12-13 सितंबर, 2026) के दौरान नई दिल्ली में एक बड़े टेक्नोलॉजी एजेंडे को पेश करने की तैयारी कर रहा है। सरकार एक ऐसे कोलैबोरेटिव फ्रेमवर्क पर जोर दे रही है, जो सदस्य देशों को ग्लोबल AI और सेमीकंडक्टर दिग्गजों की निर्भरता से बाहर निकाल सके।
डिजिटल संप्रभुता के लिए साझा इंफ्रास्ट्रक्चर
इस प्लान के केंद्र में है GRAIN (Global Research Advanced Infrastructure Network)। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जिसके जरिए सदस्य देश हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और सुपरकंप्यूटर्स का साझा इस्तेमाल कर सकेंगे। यह कदम ठीक वैसा ही है जैसे भारत का अपना 'IndiaAI Mission' है। साझा संसाधनों से लागत कम होगी और छोटे देशों के लिए भी AI मॉडल विकसित करना आसान हो जाएगा।
निवेश और इनोवेशन का नया द्वार
इन्फ्रास्ट्रक्चर के अलावा, भारत 'BRICS स्टार्टअप इनोवेशन फंड' और एक इनक्यूबेटर नेटवर्क लॉन्च करने पर काम कर रहा है। इसका मकसद चिप डिजाइनिंग और डीप-टेक वेंचर्स को आपस में जोड़ना है। भारत जिस तरह UPI और Aadhaar जैसे सफल डिजिटल मॉडल लाया है, वैसा ही इकोसिस्टम अब BRICS स्तर पर बनाने की योजना है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि चिप डिजाइन, हार्डवेयर और AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में आने वाले सालों में बड़ा सरकारी सपोर्ट देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी और आउटलुक
हालांकि यह प्लान शानदार है, लेकिन इसकी सफलता कई देशों के बीच तालमेल और भारी-भरकम पूंजी (Capital Expenditure) पर निर्भर करेगी। यह सरकारी बजट पर दबाव भी डाल सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे समिट के नतीजों पर नजर रखें, क्योंकि फंड की समयसीमा और एग्रीमेंट्स ही यह तय करेंगे कि भारतीय टेक कंपनियों के लिए आगे का रास्ता कितना सुनहरा होगा।
