Semicon 2.0: सरकार का ₹1.27 लाख करोड़ का दांव, सेमीकंडक्टर सेक्टर में आएगी नई क्रांति

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Semicon 2.0: सरकार का ₹1.27 लाख करोड़ का दांव, सेमीकंडक्टर सेक्टर में आएगी नई क्रांति

सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ की 'Semicon 2.0' योजना को नोटिफाई कर दिया है। इस नए फेज में अब असेंबली से आगे बढ़कर चिप डिजाइन, आरएंडडी (R&D) और स्पेशलाइज्ड मटेरियल मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा फोकस किया जाएगा।

भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण यानी 'Semicon 2.0' का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस योजना के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट रखा गया है। इसका मकसद केवल चिप असेंबली तक सीमित न रहकर, भारत को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाना है।

क्या है Semicon 2.0 का विजन?

यह पॉलिसी 6 प्रमुख पिलर्स पर टिकी है: चिप डिजाइन, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग, स्पेशलाइज्ड मटेरियल, सिलिकॉन और डिस्प्ले फैब, ATMP ऑपरेशन और टैलेंट डेवलपमेंट। सरकार ने सिलिकॉन फैब्स के लिए 40% और कंपाउंड/डिस्प्ले फैब्स के लिए 35% तक की इंसेंटिव सपोर्ट का प्रावधान किया है, जिससे कंपनियों के लिए शुरुआती खर्च का बोझ कम होगा।

निवेशकों के लिए समझदारी क्या है?

इन्वेस्टर्स को यह समझना होगा कि यह एक लॉन्ग-टर्म गेम है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग बेहद कॉम्प्लेक्स और कैपिटल-इंटेंसिव प्रोसेस है। भले ही सरकार इसे तेजी से आगे बढ़ा रही है, लेकिन पहली घरेलू सिलिकॉन फैब के 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, चिप डिजाइन और मटेरियल सप्लाई जैसे सेक्टरों में काम तुलनात्मक रूप से जल्दी शुरू हो सकता है, जो निवेशकों के लिए शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म में नजर रखने लायक हो सकता है।

जोखिम और चुनौतियां

भारत को ताइवान, साउथ कोरिया और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिनके पास दशकों का अनुभव है। फिलहाल भारत हाई-एंड इक्विपमेंट और कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है। नई स्कीम में इसे ठीक करने के लिए डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकारी फंडिंग अब KPI-बेस्ड होगी, जिसका मतलब है कि जो कंपनियां समय पर काम पूरा करेंगी, उन्हें ही इंसेंटिव का लाभ मिलेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.