सरकार ने चिप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए Semicon 2.0 का ऐलान कर दिया है, जिसमें **₹1.275 लाख करोड़** का बजट रखा गया है। नई पॉलिसी के तहत सिलिकॉन फैब्स के लिए **40%** और डिस्प्ले यूनिट्स के लिए **35%** तक सब्सिडी मिलेगी, लेकिन अब कंपनियों को कड़े निवेश मानकों को पूरा करना होगा।
बड़े बदलाव और निवेश के नए नियम
सरकार का फोकस इस बार उन कंपनियों पर है जो लंबी अवधि के लिए गंभीर हैं। नई पॉलिसी के तहत सिलिकॉन वेफर फैब्रिकेशन यूनिट्स को 40% का इंसेंटिव तब मिलेगा, जब वे कम से कम ₹20,000 करोड़ का कैपिटल इन्वेस्टमेंट करेंगी। वहीं, डिस्प्ले और अन्य स्पेशलाइज्ड सेमीकंडक्टर यूनिट्स के लिए 35% इंसेंटिव मिलेगा, जिसके लिए ₹10,000 करोड़ का निवेश करना जरूरी है। यह बदलाव उन प्रोजेक्ट्स को बाहर करने के लिए है जो सिर्फ सरकारी मदद के लिए आते हैं।
स्टार्टअप्स और टैलेंट पर फोकस
सरकार अब सिर्फ प्रोडक्शन नहीं, बल्कि इनोवेशन पर भी दांव लगा रही है। चिप डिजाइन स्टार्टअप्स के लिए सरकार ने 'को-इन्वेस्टमेंट मॉडल' पेश किया है, जहाँ प्राइवेट इक्विटी फंडिंग के बराबर सरकारी निवेश मिलेगा। साथ ही, अगले चरण में 1,00,000 और सेमीकंडक्टर इंजीनियर्स को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि चिप मैन्युफैक्चरिंग एक 'लॉन्ग जेस्टेशन' (Long Gestation) बिजनेस है, यानी इसमें रिटर्न आने में लंबा समय लगता है। 2031 तक फैब्रिकेशन यूनिट्स को पूरी तरह चालू करना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट की साइक्लिकल (Cyclical) प्रकृति और ग्लोबल पार्टनर्स पर निर्भरता भी मुनाफे और कैश-फ्लो पर असर डाल सकती है। इस मिशन की निगरानी अब प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर की एक हाई-लेवल एक्सपर्ट पैनल करेगी, जो इसे नेशनल सिक्योरिटी के नजरिए से भी अहम बनाती है।
