सरकार ने ITIs में नई जान फूंकने के लिए **₹60,000 करोड़** की PM SETU स्कीम लॉन्च की है। हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित इस योजना में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी ताकि युवाओं को इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जा सके।
भारत सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) को अपग्रेड करने के लिए 'प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एंप्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs' यानी PM SETU स्कीम का आगाज किया है। इस ₹60,000 करोड़ के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य वोकेशनल एजुकेशन और इंडस्ट्री की आज की जरूरतों के बीच की खाई को पाटना है।
कैसे काम करेगा PM SETU का मॉडल?
यह स्कीम 'हब-एंड-स्पोक' (Hub-and-Spoke) मॉडल पर आधारित है, जिसके तहत 200 सेंट्रलाइज्ड हब बनाए जाएंगे जो 800 स्पोक संस्थानों को सपोर्ट करेंगे। फंडिंग का गणित इस प्रकार है: केंद्र सरकार 50%, राज्य सरकारें 33% और प्राइवेट पार्टनर्स 17% का योगदान देंगे। मैनेजमेंट के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल्स (SPVs) का गठन किया जाएगा, जिसमें प्राइवेट सेक्टर की 51% हिस्सेदारी होगी, जबकि सरकार के पास 49% नियंत्रण रहेगा।
क्या प्राइवेट प्लेयर्स के लिए चुनौतियां हैं?
इस मॉडल के सामने एक बड़ी चुनौती 'प्राइवेट पार्टनरशिप' को लेकर है। चूंकि ये SPVs 'नॉट-फॉर-प्रॉफिट' (गैर-लाभकारी) आधार पर काम करेंगे, इसलिए प्राइवेट पार्टनर्स कोई डिविडेंड या मुनाफा नहीं निकाल पाएंगे। ऐसे में सरकार उम्मीद कर रही है कि बड़ी कंपनियां इस स्कीम से इसलिए जुड़ेंगी ताकि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार मिले, जिससे उनके रिक्रूटमेंट के बाद का ट्रेनिंग खर्च कम हो सके।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किस तरह से मैनेजमेंट को प्राइवेट SPVs को सौंपती है। निवेशकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर होगी कि फंडिंग मॉडल कितनी तेजी से जमीन पर उतरता है और क्या ये संस्थान अगले 5 सालों में 20 लाख युवाओं को जॉब-रेडी बनाने का अपना लक्ष्य हासिल कर पाते हैं या नहीं।
