मछली पालन क्षेत्र को मजबूती देने के लिए मत्स्य पालन मंत्रालय ने 'नेशनल प्लान ऑफ एक्शन फॉर स्मॉल-स्केल फिशरीज' (NPOA-SSF) की शुरुआत की है। इस योजना का लक्ष्य सरकारी नीतियों में तालमेल बिठाकर मछुआरों के जीवन स्तर को सुधारना है।
भारत सरकार ने मछली पालन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए 'नेशनल प्लान ऑफ एक्शन फॉर स्मॉल-स्केल फिशरीज' (NPOA-SSF) को लॉन्च किया है। यह एक रणनीतिक कदम है, जिसे केंद्र और राज्य सरकार की बिखरी हुई नीतियों को एक साथ लाकर अधिक प्रभावी बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे स्तर के मछुआरों को संसाधनों तक बेहतर पहुंच, सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
संगठित होगी ब्लू इकोनॉमी
अब तक मछली पालन से जुड़ी योजनाएं अक्सर अलग-थलग काम करती थीं। NPOA-SSF के तहत, सरकार 'फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन' (FAO) के मानकों को अपनाकर एक व्यवस्थित फ्रेमवर्क बना रही है। इसमें न केवल बोट सेफ्टी पर ध्यान दिया जाएगा, बल्कि वैल्यू चेन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर होगा।
भारी-भरकम बजट और निवेश
यह नीतिगत सुधार क्षेत्र में हो रहे बड़े वित्तीय निवेशों का हिस्सा है। साल 2026-27 के यूनियन बजट में सरकार ने इस सेक्टर के लिए रिकॉर्ड ₹2,761.80 करोड़ का आवंटन किया है। साथ ही, पुडुचेरी में हाल ही में ₹36.49 करोड़ की परियोजनाओं की शुरुआत इस बात का सबूत है कि सरकार 'ब्लू इकोनॉमी' को आधुनिक बनाने के लिए कितनी गंभीर है। ये पहल प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) जैसे व्यापक ढांचों के साथ मिलकर काम करेगी।
अगला कदम क्या है?
अब इस योजना को राज्यों के साथ परामर्श के जरिए और अधिक व्यावहारिक बनाया जाएगा। मंत्रालय ने 'वर्ल्ड फिशरीज डे' यानी 21 नवंबर को इसका विस्तृत ड्राफ्ट जारी करने का लक्ष्य रखा है। सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों और जानकारों के लिए यह ड्राफ्ट बहुत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसी से आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सरकारी मदद का रोडमैप तय होगा।
