उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 31 अगस्त, 2026 को लक्षद्वीप से 'Mission Rangeen Machhli 2031' की शुरुआत करेंगे। यह पहल भारत की सजावटी मछली (ornamental fisheries) इंडस्ट्री को आधुनिक और मानक बनाने के लिए है।
भारत के फिशरीज सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। 'Mission Rangeen Machhli 2031' का मुख्य उद्देश्य इस बिखरे हुए सेक्टर को एक संगठित स्वरूप देना है। इसके तहत ब्रीडिंग प्रोटोकॉल, बायो-सिक्योरिटी और क्वालिटी कंट्रोल के लिए नए नेशनल बेंचमार्क तय किए जाएंगे, जिससे भारत हाई-वैल्यू मैरीन एक्सपोर्ट्स की ओर कदम बढ़ा सकेगा।
लक्षद्वीप की अहमियत
लक्षद्वीप भारत के कुल एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) के लगभग 17 प्रतिशत हिस्से तक पहुंच प्रदान करता है। अब तक सजावटी मछली पालन का सेक्टर मानकीकरण (standardization) की कमी से जूझ रहा था। सरकार चाहती है कि नए नियमों के साथ घरेलू कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट के कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा कर सकें। इससे पहले कवरत्ती में मरीन ऑर्नामेंटल फिश हैचरी की स्थापना भी इसी विजन का हिस्सा थी।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
भले ही यह पॉलिसी सेक्टर के लिए फायदेमंद है, लेकिन निवेशकों को जमीनी हकीकत का ध्यान रखना होगा। आइलैंड से जुड़ी ऑपरेशंस में लॉजिस्टिक्स की लागत काफी ज्यादा होती है। लाइव फिश को मेन-लैंड तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एडवांस्ड कोल्ड चेन और नियंत्रित वातावरण की जरूरत होगी। यदि इन्फ्रास्ट्रक्चर समय पर तैयार नहीं हुआ, तो ट्रांसपोर्टेशन लागत के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
इसके अलावा, 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) के तहत मिलने वाली मदद अक्सर बैक-एंडेड सब्सिडी होती है, यानी शुरुआती कैपिटल का बोझ कंपनियों को खुद उठाना पड़ता है। इसका मतलब है कि बिजनेस को अपने कैश फ्लो का बेहतर प्रबंधन करना होगा।
पर्यावरण और रेगुलेटरी नियम
लक्षद्वीप के नाजुक कोरल एटॉल्स को देखते हुए, पर्यावरण और बायोसैक्योरिटी के कड़े नियमों का पालन करना किसी भी कंपनी के लिए अनिवार्य होगा। निवेशकों को भविष्य में आने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर टेंडर्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इस मिशन की सफलता इसी बात पर टिकी है कि कितनी तेजी से जरूरी सुविधाएं विकसित की जाती हैं।
