वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भारत को एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के तौर पर पेश करने के लिए नॉर्थ अमेरिका और जापान के दौरे पर हैं। जुलाई के बाद से फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने भारतीय बाजार में **₹43,000 करोड़** से ज्यादा का निवेश किया है।
राजधानी में बदली हवा, लौट रही है विदेशी पूंजी
सरकार का यह कूटनीतिक दौरा ऐसे समय में हुआ है जब फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) का रुख भारत की तरफ सकारात्मक हुआ है। साल 2026 की शुरुआत में विदेशी निवेश में भारी गिरावट देखी गई थी, लेकिन जुलाई के बाद से तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। विदेशी निवेशकों ने अब तक ₹43,000 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी की है, जिसने भारतीय बाजार को एक नया सपोर्ट दिया है।
आर्थिक विकास बनाम सामाजिक चुनौतियां
आंकड़ों में सुधार के बावजूद, निवेशकों की नजर भारत के घरेलू माहौल पर टिकी है। देश में रोजगार के अवसरों और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर युवाओं का प्रदर्शन एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। जुलाई 2026 में इन दबावों के चलते पूर्व शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में जारी प्रदर्शनों ने देश की युवा आबादी और श्रम बाजार की स्थिति के बीच की खाई को स्पष्ट कर दिया है।
मैक्रो इकोनॉमिक आउटलुक और रिस्क
इंडिया रेटिंग्स (Ind-Ra) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान जताया है। हालांकि, महंगाई और वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष की वजह से ऊर्जा कीमतों में उछाल का डर बना हुआ है। साथ ही, अल नीनो का कृषि क्षेत्र पर असर और वैश्विक बाजार की अस्थिरता भी भविष्य की ग्रोथ के लिए रिस्क फैक्टर्स हैं।
वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार ने FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए $73 अरब की विदेशी मुद्रा जुटाई है। आने वाले समय में बाजार की नजरें एंप्लॉयमेंट रिपोर्ट्स और विदेशी निवेश के ट्रेंड पर बनी रहेंगी ताकि इकोनॉमी की अगली चाल का अंदाजा लगाया जा सके।
