वाणिज्य विभाग (Commerce Department) ने एक समर्पित FTA Utilisation Cell की शुरुआत की है। इसका मकसद भारतीय एक्सपोर्टर्स को ट्रेड एग्रीमेंट्स का पूरा फायदा दिलाना और पॉलिसी व बिजनेस के बीच की दूरी को खत्म करना है।
वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) ने देश में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) के दायरे को मजबूत करने के लिए एक नई पहल की है। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि अब सरकार का फोकस सिर्फ समझौते साइन करने पर नहीं, बल्कि उनका जमीनी असर दिखाने पर है।
डील से लेकर फायदे तक का सफर
भारत की ट्रेड पॉलिसी में लंबे समय से यह समस्या रही है कि सरकार समझौते तो कर लेती है, लेकिन एक्सपोर्टर्स उसका सही लाभ नहीं उठा पाते। जटिल 'रूल्स ऑफ ओरिजिन' (Rules of Origin) और डॉक्युमेंटेशन की पेचीदगियों के कारण कंपनियां पीछे रह जाती हैं। नया सेल सरकार और बिजनेस जगत के बीच एक सेतु की तरह काम करेगा, ताकि एक्सपोर्टर्स अपनी लागत कम कर सकें और विदेशों में अपना दायरा बढ़ा सकें।
फोकस: क्वालिटी और निवेश
इस पहल का बड़ा केंद्र India-EFTA Trade and Economic Partnership Agreement (TEPA) है। इसके तहत अगले 15 सालों में $100 बिलियन के निवेश और 10 लाख नई नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य है। सरकार ने सभी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल को 5 साल का एक्शन प्लान बनाने को कहा है ताकि घरेलू कंपनियां ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से तैयार हो सकें।
चुनौतियों का क्या होगा?
रास्ता आसान नहीं है। 'नॉन-टैरिफ बैरियर्स' (Non-tariff barriers) आज भी एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी चुनौती हैं। पैकेजिंग के नियम, क्वालिटी सर्टिफिकेशन और सुरक्षा मानकों के कारण कई बार टैक्स छूट मिलने के बावजूद भारतीय माल विदेशी बाजारों में नहीं पहुंच पाता। हालांकि, अगर नया सेल इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने में सफल रहता है, तो उन सेक्टर्स के लिए बड़ी राहत होगी जो अब तक ट्रेड पैक्ट्स का फायदा लेने में संघर्ष कर रहे थे।
