WorkIndia Rojgar Report 2026 के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश में कुल जॉब आवेदकों में महिलाओं की हिस्सेदारी **43.5%** है, लेकिन कंपनियों की ओर से केवल **13%** भूमिकाएं ही उनके लिए तय की जा रही हैं। यह गैप कॉर्पोरेट हायरिंग स्ट्रैटेजी पर सवाल उठा रहा है।
हायरिंग में असंतुलन की हकीकत
WorkIndia Rojgar Report 2026 के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में महिला आवेदकों की संख्या 40.4% से बढ़कर 43.5% हो गई है। हैरानी की बात यह है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं के लिए आरक्षित पदों का आंकड़ा अभी भी 13% पर स्थिर है। इससे साफ पता चलता है कि वर्कफोर्स में बदलाव तो आ रहा है, लेकिन कंपनियों की हायरिंग पॉलिसी उस रफ्तार से नहीं बदली है।
कॉम्पिटिशन और सेक्टर का दबाव
लेबर मार्केट में कॉम्पिटिशन का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। कुल जॉब एप्लीकेशन्स में 65% की सालाना उछाल आई है, जबकि नई नौकरियों के अवसर केवल 40% से 48% की दर से बढ़े हैं। आईटी (IT), ह्यूमन रिसोर्सेज और अकाउंटिंग जैसे सेक्टरों में आवेदकों की भारी भीड़ है, जिससे एंट्री-लेवल सैलरी पर दबाव बढ़ सकता है।
सेल्स सेक्टर में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है, जहां कुल 56 लाख (5.6 million) से अधिक आवेदन आए हैं। दूसरी तरफ, टीचिंग और ब्यूटी सर्विसेज में महिलाओं का दबदबा बरकरार है, जहां उनकी भागीदारी क्रमशः 86.6% और 80.7% है।
रीजनल भाषा का महत्व और ग्रोथ
एक सकारात्मक बदलाव यह है कि अब करीब 92% जॉब पोस्टिंग के लिए हाई-लेवल अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब हिंदी और अन्य रीजनल भाषाओं को महत्व दिया जा रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में विस्तार करने वाली कंपनियों के लिए यह एक बड़ा मौका है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि लॉन्ग-टर्म प्रोडक्टिविटी बनाए रखने के लिए कंपनियों को अब सेफ्टी, एक्सेसिबिलिटी और समावेशी वर्क कल्चर पर ज्यादा ध्यान देना होगा। अगर कॉर्पोरेट इंडिया इस महिला वर्कफोर्स का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो विकास की कई संभावनाएं अधूरी रह सकती हैं।
