India-Japan Trade: कारोबार पहुंचा $27.5 अरब, भारत में ₹10 ट्रिलियन निवेश का लक्ष्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
India-Japan Trade: कारोबार पहुंचा $27.5 अरब, भारत में ₹10 ट्रिलियन निवेश का लक्ष्य

भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार **$27.5 अरब** तक पहुंच गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना ​​है कि इसमें अभी और बढ़ने की काफी गुंजाइश है। सरकार ने अगले दशक में **10 ट्रिलियन येन** निवेश का लक्ष्य रखा है, खासकर सेमीकंडक्टर, AI और अगली पीढ़ी की मोबिलिटी जैसे हाई-ग्रोथ वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

व्यापार में मजबूती, पर अभी और है%

भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर में लगभग $27.5 अरब रहा। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह आंकड़ा दोनों देशों की आर्थिक क्षमता से काफी कम है। उन्होंने UP-Japan इन्वेस्टमेंट मीट 2026 में इस बात पर जोर दिया कि जापानी पूंजी के बढ़ते प्रवाह से आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की योजना है।

10 ट्रिलियन येन निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

सरकार ने अगले दशक में भारत में जापानी निवेश 10 ट्रिलियन येन तक लाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। इस रणनीति के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, बैटरी टेक्नोलॉजी, एनर्जी प्रोजेक्ट्स और नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी सॉल्यूशंस जैसे हाई-टेक और भविष्य के लिए तैयार क्षेत्रों में फंड लगाया जाएगा। ये क्षेत्र भारत की औद्योगिक विकास नीति की प्राथमिकता हैं, क्योंकि देश अपनी मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षमताओं का विस्तार करना चाहता है।

जापान भारत का अहम साझेदार

जापान पहले से ही भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के मामले में पांचवें स्थान पर है। भारत में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें Suzuki, Toyota, Honda, Sony, Hitachi और Mitsubishi जैसे मशहूर नाम शामिल हैं। इन कंपनियों ने देश में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है और मेट्रो सिस्टम और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग किया है।

उत्तर प्रदेश बना खास फोकस

निवेश मीट के दौरान, उत्तर प्रदेश को नई परियोजनाओं के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उजागर किया गया। राज्य खुद को जापानी कंपनियों के लिए एक केंद्रीय हब के रूप में स्थापित कर रहा है, अपने बढ़ते उपभोक्ता बाजार, बेहतर बुनियादी ढांचे और श्रम शक्ति पर जोर दे रहा है। राज्य में 18 से 23 अगस्त तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 200 से अधिक जापानी नीति निर्माताओं और व्यापारिक नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शामिल है, जिसका नेतृत्व यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोतारो नागासाकी कर रहे हैं।

मंत्री की जापान यात्रा

इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए, मंत्री गोयल 24 से 27 अगस्त, 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे। इस यात्रा में 10 ट्रिलियन येन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक विशिष्ट व्यापार समझौतों और निवेश ढांचे पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।

आगे की राह

सहयोग बढ़ाने की योजना भले ही स्पष्ट हो, लेकिन वास्तविक निवेश की गति कई बाहरी और आंतरिक कारकों पर निर्भर करेगी। वैश्विक ऊर्जा मूल्य रुझान और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता जैसी व्यापक आर्थिक स्थितियां अक्सर यह प्रभावित करती हैं कि कंपनियां विभिन्न देशों में पूंजी कैसे आवंटित करती हैं। इसके अतिरिक्त, वैश्विक इक्विटी बाजारों में अस्थिरता और विदेशी संस्थागत निवेश पैटर्न में बदलाव जैसे कारक आमतौर पर बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं की योजना और निष्पादन को प्रभावित करते हैं। निवेशक आगामी मंत्रिस्तरीय यात्रा के परिणामों पर नज़र रखेंगे ताकि नीतिगत प्रगति और विशिष्ट परियोजनाओं की घोषणाओं पर अपडेट प्राप्त हो सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.