सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च अप्रैल से अगस्त के बीच **18.2%** बढ़ा है, लेकिन इसी दौरान फिस्कल डेफिसिट सालाना लक्ष्य के **41.9%** पर पहुंच गया है। टैक्स कलेक्शन में सुस्ती और बढ़ते सब्सिडी बिल ने सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ा दिया है।
सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, जैसे सड़क और रेलवे, पर फोकस लगातार जारी है। इसी का नतीजा है कि अप्रैल से अगस्त के बीच इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर खर्च 18.2% बढ़ा है। हालांकि, इस रफ्तार के साथ-साथ सरकारी खजाने पर दबाव भी बढ़ रहा है।
फिस्कल डेफिसिट का गणित
सरकारी कमाई और खर्च का अंतर, यानी फिस्कल डेफिसिट, इस वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में बजट अनुमान का 41.9% हो गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह 38.1% था। अगर इसे आंकड़ों में देखें, तो यह कमी ₹7 लाख करोड़ के पार चली गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 19% अधिक है।
टैक्स कलेक्शन और सब्सिडी की चुनौती
डेफिसिट बढ़ने के पीछे मुख्य वजह इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में आई गिरावट है। हालांकि कॉर्पोरेट और पर्सनल इनकम टैक्स में 15.4% और 12.3% की अच्छी बढ़त दिखी है, लेकिन GST कलेक्शन में 3.4% की गिरावट और एक्साइज ड्यूटी में 22.6% की भारी कमी देखी गई है।
दूसरी तरफ, ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सरकार का सब्सिडी बिल 24.4% बढ़ गया है।
आगे का रास्ता
सरकार का लक्ष्य फिस्कल डेफिसिट को 4.5% से 4.6% के दायरे में रखना है, जिसके लिए 11% से ज्यादा की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ की दरकार है। अब सबकी नजरें आने वाले महीनों के टैक्स डेटा और क्रूड ऑयल की कीमतों पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि क्या सरकार अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल कर पाएगी या उसे अपनी उधारी की योजनाओं में बदलाव करना पड़ेगा।
