भारत में जुलाई महीने के लिए खुदरा महंगाई दर बढ़कर **4.45%** हो गई है, जो पिछले 19 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। सब्जियों के दाम बढ़ने से फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, दूसरी ओर Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने ऐलान किया है कि वे 2027 में अपने पद पर बने नहीं रहेंगे, जिससे नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अलावा, SEBI ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session) की स्थिरता पर सफाई दी है, जबकि सरकार UPI ट्रांजेक्शन (Transaction) की लागत की समीक्षा कर रही है।
महंगाई ने बढ़ाई चिंता
भारत में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) जुलाई में बढ़कर 4.45% पर पहुंच गई है, जो जून के 4.38% की तुलना में अधिक है। यह पिछले 19 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। प्याज, अदरक और लहसुन जैसी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल के कारण फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) बढ़कर 5.52% हो गया है। हालांकि, कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) – जिसमें फूड और फ्यूल (Fuel) की अस्थिर कीमतें शामिल नहीं होतीं – 3.9% पर स्थिर बना हुआ है। यह स्थिति बताती है कि महंगाई मुख्य रूप से सप्लाई-साइड (Supply-side) की बाधाओं के कारण बढ़ी है, न कि मांग के दबाव के कारण। इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
Tata Sons में नेतृत्व परिवर्तन
एक अहम कॉर्पोरेट खबर में, Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने पुष्टि की है कि वे 20 फरवरी 2027 को अपना कार्यकाल पूरा होने पर फिर से नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। यह घोषणा महीनों की अटकलों पर विराम लगाती है और हाल ही में बोर्ड के अन्य सदस्यों के इस्तीफे के बाद आई है। यह नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय में हो रहा है जब ग्रुप के गवर्नेंस स्ट्रक्चर (Governance Structure) को लेकर चर्चाएं जारी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि Tata Trusts के पास कंपनी का लगभग 66% नियंत्रण है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इतने बड़े समूह में नेतृत्व परिवर्तन अक्सर अनिश्चितता का दौर ला सकता है, जिससे Tata Group के स्टॉक्स (Stocks) में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
SEBI का क्लोजिंग ऑक्शन पर बयान
बाजार नियामक SEBI ने हाल ही में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लेकर चिंताओं को दूर किया है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा कि नियामक को नए सिस्टम में किसी भी तरह की हेरफेर (Manipulation) के सबूत नहीं मिले हैं, जिसने पिछले वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (Volume-Weighted Average Price) मैकेनिज्म की जगह ली है। नियामक ने बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम की सक्रिय निगरानी जारी रखने पर जोर दिया है और कमोडिटी इंडेक्स (Commodity Indices) में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (Foreign Portfolio Investors) की व्यापक पहुंच की अनुमति देने के प्रस्तावों पर भी विचार कर रहा है।
UPI ट्रांजेक्शन लागत की समीक्षा
वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) इकोसिस्टम (Ecosystem) की स्थिरता का मूल्यांकन कर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 तक UPI ट्रांजेक्शन (Transactions) की ऑपरेशनल लागत ₹20,700 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो ₹2,000 करोड़ के बजट आवंटन से काफी अधिक है। इस अंतर को पाटने के लिए, सरकार कुछ उच्च-मूल्य वाले ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) को फिर से शुरू करने या एक टियर्ड (Tiered) प्रोत्साहन संरचना लागू करने जैसी रणनीतियों पर विचार कर रही है। इस तरह के किसी भी नीतिगत बदलाव का असर आने वाले महीनों में फिनटेक (Fintech) और भुगतान उद्योग (Payments Industry) के खिलाड़ियों के लिए एक प्रमुख कारक होगा जिस पर नज़र रखनी होगी।
