India Inc Talent Leak: क्या 'Missing Middle' संकट से खतरे में है कंपनियों का भविष्य?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Inc Talent Leak: क्या 'Missing Middle' संकट से खतरे में है कंपनियों का भविष्य?

Great Place To Work India की 2026 की रिपोर्ट ने कॉरपोरेट जगत की एक बड़ी चिंता को उजागर किया है। एंट्री लेवल पर महिलाओं की भागीदारी **28%** है, जो मिड-मैनेजमेंट तक पहुंचते-पहुंचते घटकर सिर्फ **17%** रह जाती है। इस 'मिसिंग मिडिल' गैप से कंपनियों की लीडरशिप पाइपलाइन कमजोर हो रही है।

भारतीय कंपनियां इन दिनों एक शांत लेकिन गंभीर खतरे का सामना कर रही हैं। यह खतरा है मिड-मैनेजमेंट लेवल पर अनुभवी महिला टैलेंट का बाहर निकल जाना। 2026 की रिसर्च के मुताबिक, कंपनियां एंट्री लेवल पर तो महिलाओं को अच्छे से हायर कर रही हैं, लेकिन जैसे ही वे करियर के उस अहम पड़ाव पर पहुंचती हैं जहां से लीडरशिप के लिए ग्रूमिंग शुरू होती है, वे बाहर निकल जाती हैं।

'कोलिजन जोन' और बिजनेस पर असर

विशेषज्ञ इसे 'कोलिजन जोन' (Collision Zone) कह रहे हैं। यह वह समय होता है जब करियर में आगे बढ़ने का दबाव और परिवार की जिम्मेदारियां एक साथ टकराती हैं। कंपनियों के लिए यह सिर्फ डाइवर्सिटी का मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ा फाइनेंशियल और ऑपरेशनल रिस्क है। जब अनुभवी कर्मचारी प्राइम करियर वर्षों में कंपनी छोड़ते हैं, तो कंपनी अपनी 'इंस्टीट्यूशनल मेमोरी' और उन पर किए गए ट्रेनिंग इन्वेस्टमेंट को खो देती है।

इतना ही नहीं, यह सी-सुइट (C-suite) और एग्जीक्यूटिव पदों के लिए टैलेंट पूल को भी छोटा कर देता है। टॉप लेवल पर डाइवर्सिटी की कमी का सीधा असर कंपनी के इनोवेशन, फैसले लेने की क्षमता और लंबे समय में बिजनेस की कॉम्पिटिटिवनेस पर पड़ता है।

निवेशक क्यों रख रहे हैं नजर?

आजकल निवेशक सिर्फ तिमाही मुनाफे को ही नहीं, बल्कि कंपनी की 'सस्टेनेबल' टीम बनाने की क्षमता को भी देख रहे हैं। यदि कोई कंपनी मिड-करियर लेवल पर टैलेंट नहीं बचा पा रही है, तो उसके रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग कॉस्ट बढ़ जाते हैं, जो अंततः ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव डालते हैं। साथ ही, ESG (एनवायरमेंटल, सोशल, और गवर्नेंस) मानकों के दौर में, एक समावेशी वर्कफोर्स कंपनी की हेल्थ का बड़ा इंडिकेटर है।

अब बड़ी कंपनियां सिर्फ हायरिंग कोटा तक सीमित नहीं रह रही हैं। वे 'इक्विटी ऑफ एक्सपीरियंस' पर ध्यान दे रही हैं, जिसमें फ्लेक्सिबल वर्क कल्चर और केयरगिविंग सपोर्ट जैसे कदम शामिल हैं। शेयरधारकों के लिए अब यह देखना जरूरी होगा कि कौन सी कंपनियां अपनी लीडरशिप पाइपलाइन को सुरक्षित रखने में कितनी सफल होती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.