ICRA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में भारतीय कंपनियों का रेवेन्यू **13-15%** बढ़ सकता है, लेकिन इनपुट कॉस्ट बढ़ने से ऑपरेटिंग मार्जिन में **100-150 बेसिस पॉइंट्स** की गिरावट तय है।
भारतीय लिस्टेड कंपनियों के लिए सितंबर तिमाही के नतीजे मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि India Inc. का रेवेन्यू 13% से 15% तक बढ़ सकता है। हालांकि, यह बढ़त सेल्स और डिमांड के मोर्चे पर तो अच्छी खबर है, लेकिन कंपनियों की असली कमाई यानी प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी दबाव देखने को मिल रहा है।\n\n### मार्जिन पर बढ़ता संकट\n\nऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में 100 से 150 बेसिस पॉइंट्स यानी 1% से 1.5% तक की कटौती की आशंका है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनियों को अपना मुनाफा बचाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।\n\n### प्रॉफिटेबिलिटी क्यों गिर रही है?\n\nइस मार्जिन में गिरावट की मुख्य वजह कच्चा माल (Raw Material), फ्यूल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत है। पश्चिमी एशिया (West Asia) में जारी तनाव के कारण कमोडिटी और एनर्जी की कीमतें अनिश्चित बनी हुई हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने इम्पोर्ट की लागत को और बढ़ा दिया है, जिससे कंपनियों के लिए मार्जिन मैनेज करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। पेट्रोलियम रिफाइनिंग, FMCG और सीमेंट जैसे सेक्टर्स के लिए यह दौर सबसे कठिन बना हुआ है।\n\n### घरेलू मांग बनाम निर्यात की सुस्ती\n\nमार्केट में एक साफ अंतर दिख रहा है। ऑटोमोबाइल, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे घरेलू डिमांड पर निर्भर सेक्टर्स बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, आईटी (IT), अपैरल और टेक्सटाइल जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स ग्लोबल बाजार में सुस्ती और ट्रेड प्रोटेक्शनिज्म के कारण जूझ रहे हैं।\n\n### वित्तीय मजबूती बरकरार\n\nअच्छी खबर यह है कि कुल मिलाकर India Inc. की फाइनेंशियल हेल्थ स्टेबल है। एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियों का 'इंटरेस्ट कवरेज रेशियो' 4.9 से 5.2 गुना के हेल्दी लेवल पर रहेगा, जिसका मतलब है कि कर्ज चुकाने में कंपनियों को फिलहाल कोई दिक्कत नहीं आएगी।
