India Inc Festive Hiring 2026: 2.7 लाख नौकरियां, छोटे शहरों पर फोकस, पर वेतन में अभी भी बड़ा अंतर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Inc Festive Hiring 2026: 2.7 लाख नौकरियां, छोटे शहरों पर फोकस, पर वेतन में अभी भी बड़ा अंतर

भारतीय कंपनियां 2026 के फेस्टिव सीजन के लिए कमर कस रही हैं और छोटे शहरों पर खास ध्यान दे रही हैं। उम्मीद है कि इस बार **2.5 से 2.7 लाख** अस्थायी (temporary) नौकरियां पैदा होंगी, जिनमें से **45%** छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) से होंगी। हालांकि, मेट्रो शहरों और छोटे शहरों के कर्मचारियों के बीच वेतन में **25-30%** का अंतर अभी भी बना हुआ है।

छोटे शहरों पर दांव

India Inc 2026 के फेस्टिव सीजन के लिए 2.5 लाख से 2.7 लाख तक अस्थायी (temporary) और गिग वर्कर (gig worker) की पोजीशन के लिए भर्ती करने की योजना बना रही है। यह पिछले साल की तुलना में भर्ती में 15-20% की बढ़ोतरी है, क्योंकि कंपनियां छोटे शहरों में बढ़ती कंज्यूमर डिमांड का फायदा उठाना चाहती हैं।

खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस है, जो कुल फेस्टिव हायरिंग का करीब 45% हिस्सा होंगे। यह रणनीति इसलिए अहम है क्योंकि ऑफलाइन और ऑनलाइन रिटेल मार्केट मेट्रो शहरों से आगे बढ़ रहा है। कंपनियां अगस्त से दिसंबर के बीच कंज्यूमर खर्च में आने वाली तेजी को पूरा करने के लिए पिछले सालों से पहले ही प्लानिंग शुरू कर चुकी हैं।

वेतन का बढ़ता फासला

इन छोटे शहरों में इतनी मेहनत के बावजूद, मेट्रो शहरों के मुकाबले वहां के कर्मचारियों की सैलरी में 25-30% का अंतर है। हालांकि, यह गैप चार साल पहले के 40% के मुकाबले कम हुआ है, लेकिन गिग लेबर मार्केट में यह अभी भी एक बड़ी सच्चाई है। रिटेल और क्विक-कॉमर्स जैसे सेक्टर में यह अंतर लिविंग कॉस्ट और कंज्यूमर डिमांड के कारण है।

टैलेंट की कमी और चुनौतियां

कंपनियों को मैनपावर जुटाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में 30% तक टैलेंट की कमी है, जिससे भर्ती मुश्किल हो रही है। वहीं, छोटे शहरों में भी लेबर सप्लाई कम हो रही है क्योंकि लोग बड़े शहरों या विदेश में काम करने जा रहे हैं। इस दोहरी मार के चलते कंपनियों को पीक सेल्स के दौरान ऑपरेशनल दिक्कतें से बचने के लिए और भी पुख्ता रिक्रूटमेंट स्ट्रैटिजी अपनानी पड़ रही है।

ऑपरेशनल डेंसिटी का असर

इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, कर्मचारियों की कमाई सिर्फ बेसिक पे पर ही नहीं, बल्कि ऑपरेशनल फैक्टर्स पर भी निर्भर करती है। मेट्रो शहरों में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव्स एक शिफ्ट में ज्यादा काम पूरा कर पाते हैं। वहीं, छोटे शहरों में कंज्यूमर डेंसिटी कम होने के कारण डिलीवरी वर्कर्स को ज्यादा लंबा सफर तय करना पड़ता है, जिससे वे एक दिन में कम ऑर्डर पूरे कर पाते हैं। इसका सीधा असर उनकी कुल कमाई पर पड़ता है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

यहां सबसे अहम होगा यह देखना कि कंपनियां अपनी हायरिंग प्लान्स को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाती हैं। मेट्रो शहरों में अस्थायी स्टाफ का वेतन 12-15% और छोटे शहरों में 8-10% बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में कंपनियों को बढ़ते लेबर कॉस्ट और सर्विस लेवल बनाए रखने की जरूरत के बीच संतुलन साधना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस भर्ती अभियान को ऑपरेशनल एफिशिएंसी और मार्जिन को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे मैनेज करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.