वित्तीय वर्ष 2027 की पहली छमाही में भारतीय कंपनियों की क्रेडिट हेल्थ ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। अपग्रेड-टू-डाउनग्रेड रेशियो बढ़कर **3.95x** पर पहुंच गया है, जो कंपनियों की मजबूती को दर्शाता है। हालांकि, ग्लोबल चुनौतियों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
भारतीय कॉरपोरेट जगत ने अपनी वित्तीय स्थिरता का लोहा मनवाया है। CareEdge Ratings की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में अपग्रेड-टू-डाउनग्रेड रेशियो 3.95x के स्तर पर पहुंच गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि हर 1 कंपनी के डाउनग्रेड होने के मुकाबले लगभग 4 कंपनियों की रेटिंग में सुधार हुआ है। इस अवधि में 300 रेटिंग अपग्रेड्स के मुकाबले केवल 76 डाउनग्रेड्स देखे गए, जिससे डाउनग्रेड रेट गिरकर 4% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है। ICRA और CRISIL जैसी अन्य रेटिंग एजेंसियों ने भी भारतीय कंपनियों की इस मजबूत स्थिति की पुष्टि की है।
एक दशक का सुधार
भारत की कंपनियों की यह मजबूती अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे एक दशक की मेहनत है। साल 2016 से कंपनियों का कुल कर्ज (gearing) 1.04x से घटकर 0.50x पर आ गया है। वहीं, ब्याज चुकाने की क्षमता (interest coverage ratio) सुधरकर 7.59x हो गई है। यह बफर कंपनियों को बढ़ती लागत और सुस्त ग्रोथ के दौर में सुरक्षित रखने का काम करेगा।
सेक्टरवार प्रदर्शन
क्रेडिट क्वालिटी में सुधार के पीछे मुख्य वजह घरेलू खपत और सरकारी खर्च है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में यह रेशियो 8.31x के जादुई आंकड़े तक पहुंच गया है, जिसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) और रिन्यूएबल एनर्जी में बेहतर दक्षता से ताकत मिली है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल्स और बैंकिंग सेक्टर ने भी अपनी बैलेंस शीट को काफी दुरुस्त किया है।
आगे की चुनौतियां
हालाँकि तस्वीर सकारात्मक है, लेकिन विश्लेषक वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही के लिए सचेत हैं। कच्चा तेल (crude oil) और ग्लोबल एनर्जी की बढ़ती कीमतें मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं। इसके साथ ही, वेस्ट एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी में अनिश्चितता सप्लाई चेन में बाधा पैदा कर सकती है। घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई भी रिटेल और ऑटो सेक्टर की मांग को प्रभावित कर सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट के बावजूद अपने मार्जिन को बरकरार रख पाती हैं या नहीं।
