भारत 12-13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है। इस समिट का मुख्य फोकस डिजिटल पेमेंट इंटीग्रेशन और **$4.2 ट्रिलियन** के SME फाइनेंसिंग गैप को कम करना है।
आर्थिक एजेंडे पर रहेगा फोकस
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस 18वें BRICS समिट का मुख्य विषय 'Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' रखा गया है। भारत के अलावा इस समिट में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कुल 11 देश हिस्सा लेंगे।
UPI और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की भूमिका
निवेशकों के लिए सबसे अहम हिस्सा डिजिटल पेमेंट है। भारत अपने Unified Payments Interface (UPI) और 'अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क' को इन देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लिए एक मॉडल के रूप में पेश कर रहा है। यदि यह सफल होता है, तो मेंबर देशों के बीच व्यापार करना न केवल सस्ता होगा, बल्कि ट्रांजैक्शन कॉस्ट में भी भारी कमी आएगी। इसके साथ ही, 'लोकल-करेंसी सेटलमेंट' पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक पेमेंट नेटवर्क पर निर्भरता कम हो सकती है।
SME सेक्टर के लिए बड़ी राहत
ब्रिक्स देशों में करीब $4.2 ट्रिलियन का SME फाइनेंसिंग गैप है। इसे भरने के लिए एक विशेष 'BRICS+ SME फाइनेंसिंग फैसिलिटी' का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें SIDBI और EXIM Bank जैसी संस्थाओं की मदद से नया डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क तैयार किया जा सकता है। यह भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के लिए निर्यात के नए रास्ते खोल सकता है।
निवेशकों के लिए सावधानी
हालाँकि यह समिट बहुत हाई-प्रोफाइल है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों को संतुलित रुख अपनाना चाहिए। रूस-यूक्रेन विवाद और चीन-भारत के बीच के जटिल संबंधों के कारण किसी भी बड़े आर्थिक समझौते पर सर्वसम्मति बनाना बड़ी चुनौती है। समिट के दौरान पेमेंट सिस्टम, क्रेडिट गारंटी और ट्रेड प्रोटोकॉल से जुड़ी घोषणाओं पर पैनी नजर रखें, क्योंकि यही भारतीय कंपनियों के भविष्य के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
