Reserve Bank of India ने **₹32,000 करोड़** का सरकारी बॉन्ड ऑक्शन आयोजित किया। देश की बैंकिंग सिस्टम में **₹9.7 ट्रिलियन** की जबरदस्त लिक्विडिटी के बावजूद ग्लोबल क्रूड और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
ऑक्शन की डीटेल्स
Reserve Bank of India (RBI) ने 4 सितंबर 2026 को सरकारी सिक्योरिटीज का ऑक्शन पूरा किया। इस प्रक्रिया के जरिए सरकार ने मार्केट से ₹32,000 करोड़ जुटाए हैं। इसमें ₹21,000 करोड़ की नई GS 2031 सिक्योरिटीज और ₹11,000 करोड़ के 7.71% GS 2066 बॉन्ड्स शामिल थे। यह पूरी नीलामी RBI के e-Kuber सिस्टम के जरिए 'मल्टीपल प्राइस मेथड' से पूरी की गई।
लिक्विडिटी का सपोर्ट और ग्लोबल रिस्क
फिलहाल घरेलू बैंकिंग सिस्टम में ₹9.7 ट्रिलियन की भारी लिक्विडिटी मौजूद है, जो सरकार की बॉरोइंग के लिए एक मजबूत कवच का काम कर रही है। बैंक इस सरप्लस नकदी को सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने के इच्छुक रहते हैं, जिससे यील्ड्स पर एक नियंत्रण बना रहता है।
हालांकि, चुनौतियां बाहर से आ रही हैं:
- क्रूड ऑयल का दबाव: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड $95 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत के लिए तेल की ऊंची कीमतें महंगाई का खतरा बढ़ाती हैं, जो आगे चलकर RBI की ब्याज दरों पर असर डाल सकती हैं।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स: अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.75% के ऊपर ट्रेड कर रही है। ग्लोबल बाजारों में बढ़ती यील्ड्स के कारण विदेशी निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे भारतीय बॉन्ड मार्केट पर दबाव दिख रहा है।
आगे की रणनीति
अब बाजार की नजरें बॉन्ड ऑक्शन के कट-ऑफ यील्ड्स पर हैं। निवेशक ग्लोबल एनर्जी कीमतों की चाल, RBI की लिक्विडिटी मैनेजमेंट रणनीति और US Federal Reserve के फैसलों पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। लंबी अवधि में भारतीय बॉन्ड मार्केट की सेहत पूरी तरह से विदेशी पूंजी के प्रवाह (Foreign Capital Inflows) पर निर्भर करेगी।
