Cold Storage Sector: 84% लक्ष्य पूरा, फिर भी बर्बाद हो रहा **₹1.5 लाख करोड़** का खाना

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AuthorMehul Desai|Published at:
Cold Storage Sector: 84% लक्ष्य पूरा, फिर भी बर्बाद हो रहा **₹1.5 लाख करोड़** का खाना

भारत ने **2037** के कोल्ड स्टोरेज क्षमता के लक्ष्य का **84%** हासिल कर लिया है, लेकिन इसके बावजूद देश में हर साल **₹1.5 लाख करोड़** का अनाज और फल-सब्जियां खराब हो रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी और आलू पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इस सेक्टर की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

बुनियादी ढांचे में बड़ी खामियां

कोल्ड स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने में मिली यह कामयाबी केवल आंकड़ों तक सीमित है। हकीकत यह है कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर में असंतुलन बहुत ज्यादा है। देश की कुल कोल्ड स्टोरेज क्षमता का 75% से ज्यादा हिस्सा केवल आलू के भंडारण के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इसका मतलब है कि फलों और अन्य सब्जियों के लिए आधुनिक और अलग-अलग तापमान वाली सुविधाएं अभी भी न के बराबर हैं।

भौगोलिक असंतुलन की मार

इतना ही नहीं, ये स्टोरेज सुविधाएं मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक ही सिमटी हुई हैं। कृषि उत्पादों की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण यह है कि खेतों के पास 'पैक-हाउस' यानी कूलिंग सेंटर नहीं हैं, जिससे मंडी तक पहुंचते-पहुंचते ही फसल खराब हो जाती है।

निवेश और भविष्य की राह

भारत को 2037 तक के इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान को पूरा करने के लिए लगभग ₹1.75 लाख करोड़ के भारी निवेश की जरूरत है। हालांकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड ने ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू करना चुनौती है।

शेयर बाजार में पिछले 8 हफ्तों की गिरावट के बीच, निवेशकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि कंपनियां कितनी तेजी से 'फार्म-टू-फोर्क' और मल्टी-कमोडिटी तकनीक अपनाती हैं। यही वह बदलाव है जो कोल्ड स्टोरेज को केवल सीजनल गोदामों से बदलकर एक मुनाफे वाला और टिकाऊ बिजनेस बना सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.