India Gas Demand: जून में खपत पहुंची 197 MMSCMD, अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Gas Demand: जून में खपत पहुंची 197 MMSCMD, अमेरिका बना सबसे बड़ा सप्लायर

जून 2026 में भारत की प्राकृतिक गैस की खपत बढ़कर **197 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (mmscmd)** तक पहुंच गई है। सिटी गैस और रिफाइनरी सेक्टरों में आई तेजी ने खपत को बढ़ाया है। हालांकि, बढ़ती ग्लोबल LNG कीमतों और सप्लाय को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा इस सेक्टर के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि कैसे बढ़ती इंपोर्ट कॉस्ट और ग्लोबल ट्रेड पैटर्न में बदलाव घरेलू गैस पर निर्भर कंपनियों को प्रभावित कर सकते हैं।

जून 2026 में गैस की मांग में रिकवरी

जून 2026 में भारत की प्राकृतिक गैस की खपत में रिकवरी देखी गई, जो 197 mmscmd तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी देश की गैस खपत को पहले के स्तर के करीब ला रही है। कई अहम औद्योगिक सेक्टर्स में मांग बढ़ने से यह संभव हुआ है। पावर सेक्टर को छोड़ दें तो, खपत में महीने-दर-महीने 7% की बढ़ोतरी हुई है, जो साफ दिखाता है कि यह रिकवरी किसी एक सेक्टर पर निर्भर नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में फैली है।

सप्लाय में बड़ा बदलाव: अमेरिका बना टॉप सप्लायर

भारत अपने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सोर्सिंग में बड़े बदलाव का गवाह बना है। पिछले पैटर्न से बिल्कुल हटकर, मई-जुलाई 2026 की अवधि के लिए अमेरिका देश का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है। यह बदलाव तब आया है जब कतर से इंपोर्ट में भारी गिरावट आई है, जो 91% तक कम हो गया है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों से सोर्सिंग की लॉजिस्टिक्स और चीन जैसे बड़े खरीदारों से लगातार प्रतिस्पर्धा सप्लाई चेन को और जटिल बना रही है।

औद्योगिक मांग में व्यापक बढ़ोतरी

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क, रिफाइनरी और अन्य विभिन्न औद्योगिक यूजर्स के मजबूत प्रदर्शन ने इस रिकवरी को लीड किया। घरेलू गैस उत्पादन स्थिर रहने के कारण, मांग को पूरा करने में इंपोर्ट का बड़ा योगदान रहा। अकेले जून में, LNG इंपोर्ट पिछले महीने की तुलना में 13% बढ़कर 110 mmscmd तक पहुंच गया। विदेशी सप्लाई पर यह भारी निर्भरता का मतलब है कि भारत की इंपोर्ट निर्भरता 56% पर बनी हुई है, जिससे यह सेक्टर ग्लोबल गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है।

ऊंची कीमतों की चुनौती

जहां मांग बढ़ रही है, वहीं गैस सेक्टर के लिए वित्तीय माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। एशियाई स्पॉट LNG की कीमतें बढ़ी हैं और हाल ही में $20 प्रति MMBtu (मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) को पार कर गई हैं। भारतीय कंपनियों के लिए, ये बढ़ी हुई कीमतें ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव डालती हैं, क्योंकि कच्चे माल की लागत काफी बढ़ जाती है। यदि ग्लोबल कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों के लिए इन लागतों को उपभोक्ताओं पर डालना मुश्किल हो सकता है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव सेक्टर्स में।

आगे का अनुमान और ध्यान देने योग्य बातें

आगे चलकर, बाजार में मांग में अस्थायी नरमी देखी जा सकती है। जून और जुलाई में जहां मजबूती दिखी, वहीं विश्लेषकों को अगस्त में मौसमी कारकों और Morbi जैसे प्रमुख औद्योगिक हब में कम गतिविधि के कारण ग्रोथ में नरमी की उम्मीद है। निवेशकों को आने वाले महीनों में दो मुख्य बातों पर ध्यान देना होगा: अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतों की स्थिरता और घरेलू गैस-उपभोक्ता कंपनियों की उच्च इंपोर्ट लागत के बावजूद अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की क्षमता। सप्लाई चेन में कोई भी और बाधा या फ्लेक्सिबल LNG कार्गो के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी भारतीय उद्योग के लिए गैस की उपलब्धता को और टाइट कर सकती है, जिससे इंपोर्ट की गति और खरीद लागत पर पैनी नजर रखना अहम होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.