अक्टूबर 2026 में भारत का ग्रॉस GST कलेक्शन **₹2.31 लाख करोड़** के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें **22.9%** का उछाल दर्ज किया गया है, लेकिन डेटा के अंदर छुपे आंकड़ों ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अक्टूबर 2026 के महीने में GST कलेक्शन ने एक नया माइलस्टोन हासिल किया है। रिफंड घटाने के बाद नेट GST रेवेन्यू ₹2.03 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25.6% अधिक है। चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले 7 महीनों में कुल ग्रॉस GST कलेक्शन ₹14.78 लाख करोड़ हो चुका है, जो 13.2% की स्थिर ग्रोथ दर्शाता है।
इम्पोर्ट-लिंक्ड रेवेन्यू का गणित
आंकड़ों की गहराई में जाने पर एक बड़ा फर्क नजर आता है। जहां डोमेस्टिक GST रेवेन्यू में 15.8% की सालाना बढ़ोतरी हुई है, वहीं इम्पोर्ट-लिंक्ड GST रेवेन्यू 42.2% उछलकर ₹72,246 करोड़ पर पहुँच गया है। बाजार जानकारों का मानना है कि यह उछाल केवल बिक्री बढ़ने का नतीजा नहीं है, बल्कि ग्लोबल कमोडिटी और रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतों की वजह से इम्पोर्ट महंगा होने का संकेत है। यह कंपनियों के इनपुट कॉस्ट पर सीधा दबाव डाल सकता है।
महंगाई और खपत पर रिस्क
हेडलाइन नंबर भले ही शानदार दिखें, लेकिन 5.5% की महंगाई दर अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में लगातार तेजी के कारण आम आदमी की जेब पर असर पड़ रहा है, जिससे कंज्यूमर स्पेंडिंग में गिरावट का डर पैदा हो गया है। आने वाले समय में कंपनियां अपने मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं और क्या त्योहारों का उत्साह आगे भी बरकरार रहेगा, इस पर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं।
