वित्त मंत्रालय ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान **7.3%** जारी किया है। पिछली तिमाही में यह रफ्तार **7.8%** थी। ग्लोबल ट्रेड टेंशन और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से अर्थव्यवस्था पर दबाव साफ दिख रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जान बाकी
भले ही जीडीपी के आंकड़ों में सुस्ती दिख रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अगस्त महीने में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) ग्रोथ 8% रही है, जो यह बताती है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी मजबूती के साथ काम कर रहा है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि मंदी का असर हर सेक्टर पर बराबर नहीं है और औद्योगिक गतिविधि अभी भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है।
एक्सटर्नल रिस्क और चुनौतियां
सरकार के अनुसार, ग्लोबल ट्रेड रिलेशन और क्रूड ऑयल इम्पोर्ट से जुड़ी अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण एनर्जी और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल भारत के पास $765.9 बिलियन का फॉरेक्स रिजर्व है, जो करेंसी की उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए एक बड़ा बफर माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
मार्केट की नजर अब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के आउटफ्लो पर है। हालांकि, अप्रैल से जुलाई के बीच $13.4 बिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है, जो लंबे समय के लिए भारत की कहानी पर भरोसा दिखाता है। अब निवेशकों को महंगाई के नए आंकड़ों और मॉनेटरी पॉलिसी में होने वाले संभावित बदलावों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि यही भविष्य में कंपनियों की फंड जुटाने की लागत तय करेंगे।
