भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में **7.8%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जो RBI के **7%** के अनुमान से कहीं ज्यादा है। मैन्युफैक्चरिंग और सरकारी खर्च में तेजी के कारण इकोनॉमिस्ट ने FY27 के लिए अपने ग्रोथ आउटलुक को अपग्रेड कर दिया है।
अगस्त 31 को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार काफी तेज रही। यह विकास दर पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 6.9% के मुकाबले काफी बेहतर है, जो ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
विकास के इंजन: मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज
इस ग्रोथ में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान सबसे अहम रहा, जहां ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 9.2% की बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, सर्विसेज सेक्टर में लगातार तीसरी तिमाही में 12% का डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज किया गया है। इसके अलावा, फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 11.9% की वृद्धि यह बताती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और फैक्ट्रियों में सरकारी और प्राइवेट निवेश का जोर बना हुआ है।
मार्जिन और ग्रोथ के लिए चुनौतियां
भले ही आंकड़े मजबूत हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मार्केट में कुछ जोखिमों पर नजर बनाए हुए हैं। नॉमिनल और रियल GDP के बीच बढ़ता अंतर यह संकेत देता है कि कीमतों में बदलाव का डेटा पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical tension) ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। अगर इनपुट लागत (input costs) बढ़ती है, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। आने वाले समय में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की पॉलिसी और इन्फ्लेशन डेटा पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
