India Forex Reserves: खज़ाना भरा! विदेशी मुद्रा भंडार $9.9 अरब बढ़कर $716.9 अरब हुआ

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
India Forex Reserves: खज़ाना भरा! विदेशी मुद्रा भंडार $9.9 अरब बढ़कर $716.9 अरब हुआ

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में 14 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान $9.905 अरब की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। अब कुल भंडार $716.907 अरब पर पहुंच गया है। RBI की नीतियों के चलते यह लगातार तीसरा हफ्ता है जब भंडार में वृद्धि देखी गई है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है।

भंडार में तूफानी तेज़ी

14 अगस्त 2026 को खत्म हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में $9.905 अरब का ज़बरदस्त इजाफा हुआ है। इस बढ़त के बाद कुल भंडार $716.907 अरब पर पहुँच गया है। यह लगातार तीसरा हफ्ता है जब भंडार में बढ़ोतरी देखी गई है। पिछले रिपोर्टिंग पीरियड में $14.136 अरब की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। अब देश का विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर $728.494 अरब के करीब पहुँच रहा है, जो फरवरी 2026 में दर्ज किया गया था।

भंडार क्यों बढ़ा?

इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह विदेशी मुद्रा संपत्ति (Foreign Currency Assets) में आई मज़बूत आवक है, जो $7.225 अरब बढ़कर $581.851 अरब हो गई। यह देश के भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा है और गैर-अमेरिकी मुद्राओं जैसे यूरो, पाउंड और येन के मूल्य में उतार-चढ़ाव के अनुसार इसमें डॉलर के संदर्भ में समायोजन किया जाता है। इसके अलावा, सोने के भंडार (Gold Reserves) में भी $2.679 अरब की बढ़त देखी गई, जिससे कुल सोने का भंडार $111.417 अरब पर पहुँच गया है।

RBI की रणनीति का असर

यह बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार द्वारा लिक्विडिटी (Liquidity) सुधारने के लिए किए गए सक्रिय प्रयासों का नतीजा है। फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) खाता योजना और कंसेशनल स्वैप अरेंजमेंट (Concessional Swap Arrangements) जैसे खास उपायों को लागू करने से विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में मदद मिली है। इन नीतियों ने भंडार को फिर से भरने में अहम भूमिका निभाई है, जो पहले वैश्विक बाज़ार की परिस्थितियों के कारण दबाव में था।

अर्थव्यवस्था के लिए क्यों ज़रूरी?

एक मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करता है। यह RBI को करेंसी बाज़ार में हस्तक्षेप करने और रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने की ताकत देता है। एक स्वस्थ भंडार बनाए रखने से देश वैश्विक आर्थिक झटकों, अचानक पूंजी के बहिर्वाह (Capital Outflows) या भू-राजनीतिक अस्थिरता से बेहतर तरीके से निपट सकता है, जो घरेलू वित्तीय स्थिरता पर दबाव डाल सकते हैं।

बाज़ार के जानकार इन साप्ताहिक भंडार के आंकड़ों पर बारीकी से नज़र रखते हैं, क्योंकि यह बाहरी आर्थिक स्वास्थ्य का संकेत देते हैं। हालाँकि मौजूदा रुझान सकारात्मक है, लेकिन भंडार को बनाए रखने की केंद्रीय बैंक की क्षमता वैश्विक ब्याज दर चक्रों, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाज़ारों में स्थिरता पर निर्भर करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भंडार इसी तरह बढ़ता है और फरवरी 2026 के अपने रिकॉर्ड स्तर को पार कर पाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.