भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार चौथे हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है। 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में यह **$13 अरब** घटकर **$734.6 अरब** पर आ गया है। RBI रुपये में आ रही अस्थिरता को थामने के लिए लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है।
RBI का एक्शन और भंडार में कमी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारतीय रुपये को ग्लोबल मार्केट की उठापटक से बचाने के लिए लगातार डॉलर की बिकवाली कर रहा है। फॉरेक्स रिजर्व में आई इस कमी का मुख्य कारण केंद्रीय बैंक द्वारा डॉलर की स्पॉट सेलिंग और फॉरेक्स स्वैप का उपयोग करना है। आंकड़ों के अनुसार, फॉरेन करेंसी एसेट्स $10.7 अरब घटकर $604.7 अरब रह गए हैं। वहीं, गोल्ड होल्डिंग्स में भी $2.3 अरब की गिरावट आई है और यह $106.4 अरब पर आ गया है।
ग्लोबल मार्केट का दबाव और निवेशकों के लिए संकेत
भारतीय बाजार वर्तमान में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी और अमेरिका में बढ़ रही ट्रेजरी यील्ड के दोहरे दबाव का सामना कर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी इमर्जिंग मार्केट की करेंसीज के लिए मुश्किलें पैदा की हैं।
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि RBI का यह कदम रुपये को एक दायरे में रखने की कोशिश है। हालांकि, रिजर्व में लगातार कमी आना बाहरी आर्थिक दबावों का संकेत है। जिन सेक्टरों का इंपोर्ट पर ज्यादा खर्च होता है, जैसे ऑयल मार्केटिंग, पेंट्स और केमिकल, उन पर रुपये की कमजोरी का सीधा असर देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में बाजार के जानकारों की नजर रिजर्व के आंकड़ों पर रहेगी, क्योंकि यह देश की मैक्रो-फाइनेंशियल स्टेबिलिटी का बड़ा पैमाना हैं।
