भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। फिस्कल डेफिसिट के आंकड़ों और HUL की तिमाही नतीजों के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट से आने वाले संकेतों का सीधा असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर देखने को मिलेगा।
आर्थिक मोर्चे पर दबाव की आहट
भारत के फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) के आंकड़े जल्द जारी होने वाले हैं। अगस्त तक यह बजट अनुमान का 41.9% तक पहुंच चुका है। सरकार ने कैपिटल स्पेंडिंग में तो 18.2% की बढ़ोतरी की है, लेकिन रेवेन्यू कलेक्शन सिर्फ 3.3% की रफ्तार से बढ़ा है। अनुमान है कि सब्सिडी के भारी खर्च के कारण फिस्कल डेफिसिट सालाना लक्ष्य ₹16.96 लाख करोड़ से ₹1.4 लाख करोड़ ज्यादा हो सकता है।
वहीं, सितंबर का फैक्ट्री आउटपुट डेटा त्योहारी मांग का असली टेस्ट होगा। अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ 8% थी, लेकिन कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और क्रेडिट कंडीशन में सख्ती के कारण अब सुस्ती के आसार दिख रहे हैं।
FMCG सेक्टर की अग्निपरीक्षा
Hindustan Unilever के नतीजों पर पूरी नजर है। पाम ऑयल और क्रूड ऑयल जैसी कमोडिटीज की कीमतें 2-5% बढ़ने से कंपनी के मार्जिन पर दबाव है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या HUL इन बढ़ती लागतों के बावजूद वॉल्यूम ग्रोथ को बरकरार रख पाएगी, जो भारतीय कंज्यूमर डिमांड का सही पैमाना होगा।
ग्लोबल मार्केट और IT सेक्टर
ग्लोबल मार्केट में 5% के आसपास बने US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड्स और US Federal Reserve के फैसलों पर नजर बनी हुई है। Microsoft और Cognizant की कमाई के साथ उनकी AI-संबंधित स्पेंडिंग गाइडेंस का भारतीय IT शेयरों पर सीधा असर पड़ सकता है। इन कंपनियों के खर्च में कोई भी बड़ा बदलाव Nifty IT इंडेक्स में भारी वोलैटिलिटी पैदा कर सकता है।
