भारत में इस साल शहरी फेस्टिव स्पेंडिंग गिरकर **₹1.97 लाख करोड़** रहने का अनुमान है, जो सतर्क उपभोक्ता भावना को दर्शाता है। घर-परिवारों का कर्ज GDP के **45.5%** तक पहुंचने के कारण लोग अपनी जरूरतें पूरी करने या पुराना कर्ज चुकाने के लिए सोना गिरवी रख रहे हैं।
भारत में मौजूदा फेस्टिव सीजन अर्थव्यवस्था की एक जटिल तस्वीर पेश कर रहा है। हालांकि रिटेल गतिविधियां जारी हैं, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि शहरी त्योहारों पर होने वाला खर्च घटकर ₹1.97 लाख करोड़ रह सकता है, जो कि 2025 में ₹2.10 लाख करोड़ था। शहरी खर्च में यह 6% की गिरावट और स्थिर रियल वेज ग्रोथ यह इशारा करती है कि महंगाई और तंग बजट के चलते आम आदमी पर दबाव बढ़ा है।
गोल्ड-बैकड क्रेडिट की तरफ बढ़ता रुझान
भारतीय परिवारों के कर्ज प्रबंधन के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा पिछले दो सालों में अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के नियमों को सख्त करने के बाद, उपभोक्ता अब इन महंगे लोन से दूरी बना रहे हैं। इसके बजाय गोल्ड-बैकड लोन (गोल्ड लोन) की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा है। मार्केट अनुमानों के मुताबिक, 2026 के मध्य तक गोल्ड लोन मार्केट ₹14 से ₹18.6 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। कई परिवार अब अपनी कमाई पर निर्भर रहने के बजाय अपनी पारिवारिक संपत्ति को गिरवी रखकर खर्चों की भरपाई कर रहे हैं।
वित्तीय स्थिरता पर क्या है असर?
गोल्ड लोन पर यह बढ़ती निर्भरता वित्तीय जोखिम पैदा कर रही है। सितंबर 2025 तक भारत में हाउसहोल्ड डेट GDP के 45.5% तक पहुंच चुका था, और वर्तमान रुझान यह बताते हैं कि नई उधारी निवेश के बजाय पुराने कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल हो रही है। लोग सोने के गहने गिरवी रखकर अन्य क्रेडिट लाइनें भर रहे हैं, जिससे एक ही एसेट क्लास पर जोखिम केंद्रित हो रहा है।
रेगुलेटरी और मार्केट जोखिम
नियामक इन जोखिमों को लेकर सतर्क हैं। अप्रैल 2026 में RBI ने सख्त गोल्ड लोन नॉर्म्स पेश किए, जिसमें टियर्ड Loan-to-Value (LTV) रेश्यो और ₹2.5 लाख से अधिक के लोन के लिए अनिवार्य क्रेडिट अप्रेजल शामिल है। सिस्टम के लिए सबसे बड़ा खतरा सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट का है। यदि सोने की कीमतें गिरती हैं, तो गिरवी रखी गई संपत्ति का मूल्य कम हो जाएगा, जिससे लेंडर्स के लिए जोखिम बढ़ सकता है। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) अपने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो को कैसे संभालते हैं और क्या आर्थिक स्थिति कठिन रहने पर बैड लोन में इजाफा होता है या नहीं।
