साल **2026** के फेस्टिव सीजन में भारत में **1,27,080** नई भर्तियां हुई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले **7%** ज्यादा है। जहां व्हाइट कॉलर जॉब्स में **11%** की गिरावट आई है, वहीं क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स सेक्टर में तेजी देखी जा रही है।
भारतीय जॉब मार्केट में इस वक्त दो अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। सितंबर 2026 में जहां व्हाइट कॉलर नौकरियों में 11% की गिरावट दर्ज की गई, वहीं फेस्टिव सीजन के दौरान ऑपरेशनल स्टाफ की मांग में जोरदार तेजी आई है। कुल 1,27,080 नई भर्तियों के साथ, यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 7% ऊपर है।
क्विक कॉमर्स बना ग्रोथ इंजन
इस एम्प्लॉयमेंट स्पाइक के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्विक कॉमर्स सेक्टर है, जिसने साल-दर-साल 18% की हायरिंग ग्रोथ दर्ज की है। इसके बाद ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर का नंबर है, जहां क्रमशः 12% और 10% की वृद्धि देखी गई है। ये कंपनियां अब अपना पूरा जोर 'स्पीड' और 'पहुंच' पर लगा रही हैं ताकि ग्राहकों को समय पर डिलीवरी मिल सके।
छोटे शहरों पर कंपनियों की नजर
इस सीजन में एक बड़ा भौगोलिक बदलाव देखने को मिला है। मेट्रो शहरों में हायरिंग की रफ्तार कम होकर सिर्फ 3% रह गई है। इसके उलट, टियर-2 शहरों में 11% और टियर-3 व उभरते बाजारों में 15% की ग्रोथ देखी गई है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब छोटे शहरों के कंज्यूमर बेस को पकड़ने के लिए बुनियादी ढांचे (infrastructure) में भारी निवेश कर रही हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि यह तेजी मजबूत डिमांड को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। क्विक कॉमर्स जैसे बिजनेस मॉडल ऑपरेशनल खर्चों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। त्योहारों के दौरान भारी भर्ती से कंपनियों का खर्च और लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ सकता है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि क्या कंपनियां अपनी रेवेन्यू ग्रोथ और बढ़ते खर्चों के बीच संतुलन बना पाती हैं। अगर खर्चों की रफ्तार मुनाफे से तेज रही, तो ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।
