Fertilizer Subsidy: सरकार पर बढ़ा भारी बोझ, सब्सिडी बिल **₹80,000 करोड़** पार होने के आसार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Fertilizer Subsidy: सरकार पर बढ़ा भारी बोझ, सब्सिडी बिल **₹80,000 करोड़** पार होने के आसार

सरकार के अनुमान के मुताबिक, FY27 में फर्टिलाइजर सब्सिडी की जरूरत **₹70,000 करोड़** से **₹80,000 करोड़** तक बढ़ सकती है। साल के पहले **5** महीनों में ही बजट का **58%** हिस्सा खर्च हो चुका है, जो सरकारी खजाने के लिए बड़ी चुनौती है।

भारत सरकार के सामने चालू वित्त वर्ष में फर्टिलाइजर सब्सिडी को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, यह खर्च बजट के अनुमान से ₹70,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ तक ज्यादा रह सकता है। हालांकि, यह पहले के अनुमानों से थोड़ा कम है, लेकिन ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में जारी अस्थिरता ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

सरकारी खजाने पर बढ़ता दबाव

FY27 के बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए लगभग ₹1.77 लाख करोड़ का आवंटन किया गया था। चिंता की बात यह है कि केवल 5 महीनों के भीतर ही इस बजट का 58% हिस्सा खर्च हो चुका है। कुछ एनालिस्ट्स का तो यह भी मानना है कि साल का कुल सब्सिडी आउटफ्लो ₹2.5 लाख करोड़ से लेकर ₹3.4 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

ग्लोबल मार्केट का मिला-जुला असर

राहत की बात यह है कि यूरिया (Urea) की इंटरनेशनल कीमतें, जो वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन में रुकावट के कारण बढ़ गई थीं, अब थोड़ी कम हुई हैं। हालांकि, डीएपी (DAP), एमओपी (MOP) और फॉस्फोरिक एसिड जैसे अन्य जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। इनकी लागत में उतार-चढ़ाव सब्सिडी के बोझ को कम नहीं होने दे रहा है।

फर्टिलाइजर कंपनियों पर क्या होगा असर?

फर्टिलाइजर कंपनियों के लिए यह स्थिति मुश्किल भरी है। सब्सिडी बिल बढ़ने से सरकार से मिलने वाले पेमेंट्स में देरी हो सकती है, जिससे कंपनियों का वर्किंग कैपिटल प्रभावित होता है और कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। इसके अलावा, 'न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी' स्कीम के तहत किसानों को राहत देने के कारण कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का पूरा भार उन पर नहीं डाल सकतीं, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव दिखना तय है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.