India में ₹1.5 ट्रिलियन की संपत्ति ट्रांसफर का बड़ा जोखिम, प्लानिंग में कमी आई सामने

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India में ₹1.5 ट्रिलियन की संपत्ति ट्रांसफर का बड़ा जोखिम, प्लानिंग में कमी आई सामने

अगले 10 सालों में भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी **₹1.5 ट्रिलियन** की संपत्ति ट्रांसफर होने वाली है। मगर, **36%** पारिवारिक व्यवसायों के पास सक्सेशन प्लान (Succession Plan) नहीं है, जो लंबे समय तक संपत्ति को बनाए रखने के लिए बड़ा खतरा है।

अगले दशक में ₹1.5 ट्रिलियन की वेल्थ ट्रांसफर का अनुमान

भारत एक बड़े आर्थिक बदलाव के मुहाने पर खड़ा है, जहाँ अगले 10 सालों में ₹1.5 ट्रिलियन की संपत्ति पीढ़ी-दर-पीढ़ी ट्रांसफर होने का अनुमान है। यह ट्रांसफर मुख्य रूप से हाई नेट वर्थ (High Net Worth) और अल्ट्रा हाई नेट वर्थ (Ultra High Net Worth) व्यक्तियों की बढ़ती संख्या के कारण हो रहा है। इतनी बड़ी संपत्ति के बावजूद, कई पारिवारिक व्यवसाय (Family Businesses) स्वामित्व और नियंत्रण के सुचारू हस्तांतरण के लिए तैयार नहीं हैं।

फैमिली बिज़नेस में सक्सेशन प्लानिंग का गैप

आंकड़े बताते हैं कि ऐसे 36% फैमिली बिज़नेस अभी किसी भी औपचारिक सक्सेशन प्लान के बिना काम कर रहे हैं। जबकि 79% संस्थापक (Founders) अपने परिवार के भीतर नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं, उनमें से केवल 15% ने ही हैंडओवर को निर्देशित करने के लिए ज़रूरी फ्रेमवर्क तैयार किया है। सबसे बड़ी रुकावट संस्थापकों का विरोध है, जिसके कारण 52% व्यवसाय प्लानिंग की कमी का हवाला देते हैं। इससे एक बड़ा जोखिम पैदा होता है कि उचित संरचनाओं के बिना, इन व्यवसायों की निरंतरता हस्तांतरण प्रक्रिया के दौरान खतरे में पड़ सकती है।

संपत्ति का संरक्षण बनाम जमा करना

भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट (Wealth Management) में एक आम चुनौती रियल एस्टेट, म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और इक्विटी (Equities) के ज़रिए संपत्ति जमा करने पर ज़्यादा ध्यान देना है, बजाय इसके कि इसे लंबे समय तक कैसे संभाला जाए। फाइनेंशियल सलाह अक्सर अल्पावधि रिटर्न को अधिकतम करने पर केंद्रित होती है, जो मल्टी-जेनरेशनल वेल्थ (Multi-Generational Wealth) के लिए ज़रूरी संरचनात्मक आवश्यकताओं को नज़रअंदाज़ कर सकती है। जब दूसरी पीढ़ी इन संपत्तियों को विरासत में पाती है, तो उन्हें अक्सर वह फाउंडेशनल निर्णय लेने की फिलॉसफी (Philosophy) नहीं मिलती जिसने मूल रूप से संपत्ति का निर्माण किया था।

स्थायी हस्तांतरण के लिए ज़रूरी लेयर्स

इस बदलाव को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स (Financial Experts) केवल एसेट मैनेजमेंट (Asset Management) से आगे बढ़कर एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव देते हैं। इसमें आमतौर पर तीन अलग-अलग लेयर्स शामिल होती हैं: आर्किटेक्चरल (Architectural), गवर्नेंस (Governance), और फाइनेंशियल कंटिन्यूटी (Financial Continuity)। आर्किटेक्चरल लेयर में वसीयत (Wills), ट्रस्ट (Trusts), और फैमिली ऑफिस (Family Offices) जैसे टूल शामिल हैं ताकि संपत्तियों को कानूनी चुनौतियों से बचाया जा सके। गवर्नेंस में एक फैमिली चार्टर (Family Charter) बनाना शामिल है जो निर्णय लेने की भूमिकाओं और प्रक्रियाओं को परिभाषित करता है। अंत में, फाइनेंशियल कंटिन्यूटी के लिए पोर्टफोलियो को इतने लिक्विडिटी (Liquidity) के साथ संरचित करने की आवश्यकता होती है कि वे ट्रांसफर की लागतों का प्रबंधन कर सकें, यह सुनिश्चित करते हुए कि हैंडओवर के दौरान संपत्ति की बिक्री की ज़रूरत न पड़े।

एकीकृत प्लानिंग की भूमिका

कई बिज़नेस फैमिलीज के लिए एक लगातार समस्या टैक्स एडवाइजर्स (Tax Advisors) और वेल्थ मैनेजर्स (Wealth Managers) के बीच समन्वय की कमी है। जब ये सेवाएं अलग-अलग होती हैं, तो परिणामी संरचनाएं अक्सर लिक्विडिटी की जरूरतों या दीर्घकालिक कर प्रभावों को संबोधित करने में विफल रहती हैं। एक एकीकृत ब्लूप्रिंट, जिसमें संस्थापकों, कानूनी सलाहकारों और वेल्थ मैनेजर्स के बीच सहयोग शामिल हो, उन फैमिलीज के लिए तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है जो अपनी संपत्ति को संरक्षित करना चाहती हैं। इन फैमिलीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटर (Monitor) औपचारिक गवर्नेंस और लिक्विडिटी बफ़र्स (Liquidity Buffers) की स्थापना होगी, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं कि हस्तांतरण से पारिवारिक व्यवसाय के हितों का नुकसान न हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.