भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता बेहद अहम है। सितंबर महीने के रिटेल इन्फ्लेशन के आंकड़े **5.6%** के 23 महीने के उच्चतम स्तर पर रहने का अनुमान है। RBI द्वारा रेपो रेट को **5.50%** करने के बाद अब निवेशकों की नजर कंपनियों के मार्जिन और कंज्यूमर डिमांड पर टिकी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था एक बेहद अहम पड़ाव पर है। RBI की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में बदलाव के बाद अब बाजार की निगाहें 12 अक्टूबर को आने वाले रिटेल इन्फ्लेशन के आंकड़ों पर टिकी हैं। इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई 5.6% तक पहुंच सकती है, जो कि लगातार चौथा महीना होगा जब यह RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रहेगी।
रेपो रेट और कंपनियों पर असर
7 अक्टूबर, 2026 को मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) का रुख अपनाकर RBI ने साफ कर दिया है कि करेंसी स्टेबिलिटी और महंगाई पर काबू पाना उनकी पहली प्राथमिकता है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय यह है कि ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों की बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है, खासकर उन कंपनियों पर जिन पर कर्ज का बोझ ज्यादा है।
ग्लोबल रिस्क और ट्रेड डेटा
देश के भीतर महंगाई के अलावा, ग्लोबल मार्केट की चुनौतियां भी कम नहीं हैं। 13 अक्टूबर को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) अपना 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' जारी करेगा। साथ ही, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे एनर्जी इम्पोर्टर के लिए 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' का खतरा बढ़ा रही हैं।
हालांकि, एक्सपोर्ट के मोर्चे पर राहत है। अगस्त में भारत का एक्सपोर्ट 26.1% बढ़कर $43.81 बिलियन रहा, लेकिन $26.86 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
निवेशकों को किन बातों पर रखना चाहिए फोकस?
आने वाले अर्निंग्स सीजन में बाजार यह देखेगा कि कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट का भार ग्राहकों पर डालने में कितनी सफल रहती हैं। निवेशकों को इन 3 पहलुओं पर नजर रखनी चाहिए:
- कॉस्ट मैनेजमेंट: कंपनियां अपने मार्जिन को कैसे सुरक्षित रख रही हैं?
- रूरल डिमांड: कृषि उत्पादन और ग्रामीण इलाकों से मांग की क्या स्थिति है?
- डेट प्रोफाइल: हाई-इंटरेस्ट रेट के दौर में कर्ज वाली कंपनियां अपने ब्याज के भुगतान को कैसे मैनेज कर रही हैं?
