भारत में रिटेल महंगाई (Retail Inflation) FY27 में 5.1% के आसपास रहने का अनुमान है। CRISIL का यह अनुमान RBI के 5.0% के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है। जुलाई में महंगाई 4.45% थी, लेकिन खाने-पीने और ईंधन की बढ़ती कीमतों से दबाव बना हुआ है, जिसका असर कंज्यूमर खर्च और कंपनियों के मुनाफे पर दिख सकता है।
महंगाई का गणित: क्यों है दबाव?
भारत में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। जुलाई में जहां यह 4.45% पर थी, वहीं 2026-27 यानी FY27 के लिए इसका औसत 5.1% रहने का अनुमान है। यह अनुमान रेटिंग एजेंसी CRISIL ने लगाया है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी अगस्त 2026 की पॉलिसी मीटिंग में इस अनुमान को थोड़ा कम करते हुए 5.0% बताया है।
पिछले साल की ऊंची कीमतों की तुलना का जो आंकड़ा महंगाई को नीचे रखने में मदद कर रहा था, अब वह खत्म होता दिख रहा है। सबसे बड़ी चिंता खाद्य महंगाई (Food Inflation) को लेकर है। मीट, अनाज, दालें और प्याज जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़े हैं, हालांकि आलू और टमाटर जैसी सब्जियों की कीमतों में कुछ नरमी आई है।
ईंधन की आग और कंपनियों पर असर
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी भी एक बड़ा फैक्टर है। पश्चिम एशिया में चल रहे जिओ-पॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) की वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। घरेलू स्तर पर कुकिंग फ्यूल और नेचुरल गैस के दाम बढ़े हैं, और ट्रांसपोर्ट सेक्टर की लागत भी बढ़ी है। इन बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट (Input Costs) को कंपनियां या तो खुद झेल रही हैं या फिर धीरे-धीरे ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे महंगाई कम नहीं हो पा रही है।
इसका सीधा असर कंजम्पशन (Consumption) पर निर्भर सेक्टर्स की कंपनियों पर दिख रहा है। FMCG और मैन्युफैक्चरिंग जैसी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) पर दबाव आ रहा है, क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन और रॉ मैटेरियल्स की लागत बढ़ गई है। अगर कंपनियां ये बढ़ी हुई लागतें ग्राहकों से वसूल नहीं कर पातीं, तो उनके मार्जिन पर असर पड़ेगा।
RBI का स्टैंड और ग्रोथ की उम्मीद
हालांकि, इन सबके बीच RBI ने अपनी पॉलिसी रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा है और न्यूट्रल (Neutral) स्टैंड बनाए रखा है। इसका मतलब है कि RBI महंगाई को कंट्रोल करने और इकोनॉमी को ग्रोथ देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। RBI ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दिखाता है।
आगे क्या देखना होगा?
भविष्य में, सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर सप्लाई साइड, खासकर फूड सिक्योरिटी (Food Security) होगा। मॉनसून की बारिश का असर खेती पर क्या पड़ता है, यह देखना अहम होगा। अगर बारिश कम हुई तो खाद्य कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है, जिससे मौजूदा महंगाई के अनुमानों पर सवाल खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें भी जिओ-पॉलिटिकल सिचुएशन की वजह से वोलेटाइल (Volatile) रह सकती हैं, जिसका असर फ्यूल इन्फ्लेशन पर पड़ेगा।
