सरकार अपने **₹80,000 करोड़** के FY27 विनिवेश (Divestment) लक्ष्य के **78%** तक पहुंच गई है। LIC में हिस्सेदारी बिक्री से मिली बड़ी रकम के बाद, अब सबकी निगाहें IDBI Bank के निजीकरण पर टिकी हैं।
विनिवेश की तेज रफ्तार
भारत सरकार ने चालू फाइनेंशियल ईयर में अपने विनिवेश कार्यक्रम में जबरदस्त तेजी दिखाई है। अगस्त 2026 के अंत तक सरकारी खजाने में ₹62,124 करोड़ आ चुके हैं। यह आंकड़ा सालाना लक्ष्य के लगभग 78% के बराबर है। इस सफलता के पीछे सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) में हिस्सेदारी बेचने की रणनीति रही है, जिसका फायदा मजबूत मार्केट वैल्युएशन के चलते मिला है।
इस दौरान कुल 9 ऑफर-फॉर-सेल (OFS) ट्रांजेक्शन किए गए। इसमें सबसे बड़ा योगदान LIC का रहा, जिससे अकेले ₹31,500 करोड़ से अधिक की कमाई हुई।
IDBI Bank की भूमिका
अब विनिवेश का अगला बड़ा पड़ाव IDBI Bank की बिक्री है। सरकार और LIC मिलकर बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इस सौदे के लिए Prem Watsa की कंपनी Fairfax Financial प्रमुख दावेदार मानी जा रही है। हालांकि, RBI के नियमों का पालन करने के लिए Fairfax को अपने मौजूदा पोर्टफोलियो, जैसे कि IIFL Finance में बदलाव करने पड़ सकते हैं। निवेशकों की नजर इस सौदे पर है, क्योंकि इसके सफल होने पर विनिवेश का आंकड़ा लक्ष्य से भी आगे निकल सकता है।
राजकोषीय चुनौतियां और जोखिम
सरकारी खजाने पर दबाव कम करने के लिए विनिवेश काफी महत्वपूर्ण है, खासकर फर्टिलाइजर सब्सिडी जैसे खर्चों के कारण। हालांकि, राह आसान नहीं है। IDBI Bank के निजीकरण में पहले भी देरी देखी गई है। मार्केट में उतार-चढ़ाव और सरकारी शेयरों में वोलेटिलिटी आने वाले समय में भविष्य के सौदों के वैल्युएशन पर असर डाल सकती है।
