भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की रफ्तार तेज हो गई है। पहली तिमाही में FDI **6%** बढ़कर **$19.81 बिलियन** पर पहुंच गया है, जिसमें सर्विसेज और सॉफ्टवेयर सेक्टर का बड़ा योगदान है। हालांकि, अमेरिका से आने वाले निवेश में **76%** की भारी गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
कुल निवेश और ग्रोथ की कहानी
चालू फाइनेंशियल ईयर की अप्रैल-जून तिमाही में भारत को $19.81 बिलियन का FDI मिला, जो पिछले साल की समान अवधि के $18.62 बिलियन से 6% अधिक है। यदि हम कंपनियों द्वारा अपनी भारतीय यूनिट्स में रखे गए प्रॉफिट (Reinvested Earnings) को भी जोड़ लें, तो कुल कैपिटल इनफ्लो $30.65 बिलियन हो जाता है, जो सालाना आधार पर 22% की शानदार उछाल है।
क्या है निवेश में कमी का कारण?
आंकड़ों में एक पेंच है—अप्रैल में शुरुआत तो मजबूत रही, लेकिन मई में इसमें 45% और जून में 29% की गिरावट दर्ज की गई। यह मंथली सुस्ती संकेत देती है कि ग्लोबल निवेशक अब थोड़े सतर्क हो रहे हैं या फिर नई परियोजनाओं की रफ्तार सामान्य हो रही है।
बदल गया निवेशकों का मैप
इस तिमाही में जापान सबसे बड़ा निवेशक बनकर उभरा है, जिसने $5.71 बिलियन का निवेश किया। सिंगापुर $5.22 बिलियन के साथ दूसरे नंबर पर बना हुआ है। वहीं, अमेरिका की ओर से आने वाले निवेश में 76% की बड़ी गिरावट देखी गई है, जो घटकर $1.34 बिलियन रह गया है। जानकारों का मानना है कि इंटरेस्ट रेट्स में बदलाव और मल्टीनेशनल कंपनियों की बदलती रणनीतियां इसकी मुख्य वजह हो सकती हैं।
किन सेक्टरों और राज्यों में पैसा?
- टॉप सेक्टर: सर्विसेज सेक्टर को $7.04 बिलियन और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर सेक्टर को $2.84 बिलियन का निवेश मिला है।
- टॉप राज्य: तमिलनाडु $5.95 बिलियन के साथ सबसे पसंदीदा राज्य रहा, जबकि महाराष्ट्र $4.22 बिलियन के साथ दूसरे स्थान पर है। इनके अलावा दिल्ली, कर्नाटक और गुजरात भी निवेश के बड़े हब बने हुए हैं।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह मंथली गिरावट सिर्फ एक अस्थायी दौर है या आने वाले समय में निवेश की रफ्तार और धीमी होगी।
